1993 से सेवा दे रहे JTDCL कर्मचारी को राहत, 20 फरवरी 2001 से होगा नियमितीकरण

रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने झारखण्ड पर्यटन विकास निगम लिमिटेड (JTDCL) से जुड़े मामले में याचिकाकर्ता राकेश कुमार को राहत दी है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए JTDCL को निर्देश दिया कि उनकी सेवा को 20 फरवरी 2001 से नियमित किया जाए। साथ ही उन्हें 1200-1440-30-1800 के वेतनमान में सभी परिणामी लाभ देने का भी आदेश दिया गया है।

मिली जानकारी के अनुसार, राकेश कुमार की नियुक्ति 14 जुलाई 1993 को बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड (BSTDCL) में रूम अटेंडेंट और रिसेप्शनिस्ट के रूप में हुई थी। बाद में उन्हें देवघर और बासुकीनाथ के विभिन्न पर्यटन होटलों का प्रभारी प्रबंधक भी बनाया गया। वर्ष 2000 में राज्य विभाजन और 2002 में JTDCL के गठन के बाद भी वे लगातार सेवा देते रहे। इससे पहले 2001 में पटना हाईकोर्ट ने उन्हें न्यूनतम मूल वेतन देने का आदेश दिया था। उनके समान अन्य कर्मचारियों, जिनमें जितेंद्र कुमार और अजय कुमार कश्यप शामिल हैं, को सुप्रीम कोर्ट तक से राहत मिलने के बाद बिहार में नियमित किया जा चुका था। JTDCL ने तर्क दिया था कि राकेश कुमार पुराने LPA मामलों में पक्षकार नहीं थे, लेकिन हाईकोर्ट ने यह तर्क खारिज कर दिया।
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता 1993 से लगातार लगभग 33 वर्षों से काम कर रहे हैं और सेवानिवृत्ति की कगार पर हैं। समान पद पर कार्यरत अन्य कर्मचारियों को 20 फरवरी 2001 से नियमितीकरण का लाभ मिलने के बावजूद उन्हें इससे वंचित रखना समानता के अधिकार का उल्लंघन है। सर्वोच्च न्यायालय के धर्म सिंह, जग्गो और भोला नाथ मामलों के निर्णयों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य एक संवैधानिक नियोक्ता है और स्थायी व नियमित प्रकृति के कार्यों के लिए कर्मचारियों को वर्षों तक अस्थायी या एडहॉक रखकर उनका शोषण नहीं कर सकता।


