कदमा मंडल कमेटी के गठन पर उठे सवाल, सक्रिय सदस्यता और जातिगत आधार पर दायित्व देने का आरोप

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जमशेदपुर:- भाजपा कदमा मंडल की नवगठित मंडल कमेटी को लेकर पार्टी के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि मंडल कमेटी में पदाधिकारियों का चयन योग्यता और संगठनात्मक सक्रियता के बजाय जातिगत समीकरण को ध्यान में रखकर किया गया है। इसको लेकर मंडल अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष की कार्यशैली तथा कथित जातिवादी मानसिकता पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

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भाजपा पार्टी से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं का आरोप है कि नवगठित कमेटी में ऐसे लोगों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं, जो सक्रिय सदस्य नहीं हैं। इनमें मंडल उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह लोधी, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र राय, सह-कोषाध्यक्ष संजय शर्मा तथा सह आईटी एवं सोशल मीडिया प्रभारी विक्रम यादव के नाम बताए जा रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि संगठनात्मक नियमों के अनुसार मंडल से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक महत्वपूर्ण दायित्वों के लिए सक्रिय सदस्यता का प्रावधान है। ऐसे में यदि बिना सक्रिय सदस्यता के किसी को पद दिया गया है, तो यह संगठन के नियमों और सक्रिय सदस्यता की व्यवस्था की प्रासंगिकता पर सवाल खड़ा करता है।

कार्यालय प्रभारी के निवास को लेकर भी सवाल

कमेटी में कार्यालय प्रभारी बनाए गए टीडी गांगुली को लेकर भी आपत्ति जताई गई है। आरोप है कि उनका निवास कदमा मंडल क्षेत्र में नहीं, बल्कि सोनारी मंडल में है। ऐसे में कदमा मंडल में उन्हें कार्यालय प्रभारी की जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर कार्यकर्ताओं के एक वर्ग ने सवाल उठाया है।

जाति के आधार पर जिम्मेदारी देने का आरोप

पार्टी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कदमा मंडल की नई कमेटी में पदाधिकारियों को उनकी जातीय पहचान के आधार पर जिम्मेदारियां बांटे जाने की स्थिति दिखाई दे रही है। इतना ही नहीं, आरोप यह भी है कि कमेटी में एक पदाधिकारी की जाति का उल्लेख भी कथित तौर पर गलत किया गया है।

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कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि संगठन में पदों का निर्धारण जातीय आधार पर किया जाता है तो इससे पार्टी की संगठनात्मक कार्यप्रणाली और समान अवसर की नीति पर गंभीर सवाल उठेंगे। उनका कहना है कि संगठन में पदाधिकारी का चयन उसकी सक्रियता, संगठन के प्रति योगदान, अनुभव और कार्यक्षमता के आधार पर होना चाहिए, न कि जातिगत पहचान के आधार पर।

हालांकि, इन आरोप के मामले में मंडल अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष का पक्ष अब तक सामने नहीं आया है ।

फिलहाल कदमा मंडल की नवगठित कमेटी को लेकर संगठन के अंदर उठ रहे सवालों ने सक्रिय सदस्यता, पदाधिकारियों के चयन की प्रक्रिया और संगठनात्मक पारदर्शिता को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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