आदित्यपुर के हरिओम नगर में सरेआम गुंडागर्दी: घर में घुसकर मारपीट, गाड़ियों में तोड़फोड़; केस न दर्ज करने को लेकर पुलिस महकमे पर भी सवाल, बालू माफिया छोटू झा के भाई आनंद झा उर्फ गांधी और अनुराग जायसवाल पर आरोप…

आदित्यपुर :- सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत हरिओम नगर में बेखौफ दबंगों द्वारा सरेआम कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। शहर में खुद को ‘युवा बिजनेसमैन’ के रूप में पेश करने वाले अनुराग जायसवाल और अवैध बालू माफिया छोटू झा के भाई आनंद झा उर्फ ‘गांधी’ पर एक घर में ज़बरदस्ती घुसकर मारपीट करने, पथराव कर वाहनों को क्षतिग्रस्त करने और दहशत फैलाने का गंभीर आरोप लगा है।
वारदात के दौरान घर में मौजूद महिला द्वारा रिकॉर्ड की गई सीसीटीवी मॉनिटर फुटेज अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। वायरल फुटेज और चश्मदीदों के अनुसार, आरोपी किआ (Kia) कार में सवार होकर हरिओम नगर स्थित आवासीय परिसर पहुंचे। गाड़ी से उतरते ही आरोपियों ने चिल्लाना और गाली-गलौज करना शुरू कर दिया। महिला के अनुसार, कार में आनंद झा उर्फ ‘गांधी’ और युवा व्यवसायी अनुराग जायसवाल सवार थे। गाड़ियों पर पथराव, घर में घुसकर मारपीट और फायरिंग की चर्चा फुटेज में साफ दिख रहा है कि बाहर खड़े आरोपी (अनुराग जायसवाल) ने ज़मीन से भारी पत्थर उठाकर वहां पार्क की गई कार पर बार-बार वार किया, जिससे वाहन के शीशे चकनाचूर हो गए और भारी नुकसान हुआ। इसी दौरान आनंद झा सीढ़ियों से ऊपर चढ़ा और मुख्य दरवाज़े के हैंडल व कॉल बेल को ज़ोर-ज़ोर से खटखटाकर दहशत फैलाई। पीड़ित परिवार का आरोप है कि आरोपियों ने घर में घुसकर परिजनों के साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार किया। वहीं, घटना के दौरान इलाके में गोली चलने (फायरिंग) की बात भी सामने आ रही है, जिससे पूरे मोहल्ले में अफ़रा-तफ़री मच गई। हालांकि, पुलिस की ओर से फायरिंग की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। अपनी पहचान छिपाने और वारदात के सबूत मिटाने की नीयत से आरोपियों ने घर के बाहर लगे सुरक्षा कैमरे के तारों को तोड़ने का प्रयास किया। इसके कारण मॉनिटर की स्क्रीन पर वीडियो सिग्नल धुंधला (ब्लर) होकर बंद होने लगा। पीड़ित महिला ने सूझबूझ दिखाते हुए पूरे घटनाक्रम को अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया। घटना के बाद मामला और अधिक गंभीर हो गया है। सूत्रों के हवाले से ख़बर आ रही है कि आरोपी गांधी के रसूख और प्रभाव के कारण मामले को दबाने की पुरज़ोर कोशिश की जा रही है। सूत्रों का दावा है कि पुलिस महकमे के ही कुछ कर्मचारी पीड़ित परिवार पर शिकायत दर्ज न कराने और एफआईआर वापस लेने के लिए डराने-धमकाने का प्रयास कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आर्थिक पहुंच का इस्तेमाल कानून की गिरफ्त से बचने के लिए किया जा रहा है। सीसीटीवी फुटेज में दर्ज पुख्ता सबूतों के बावजूद आरोपियों की खुलेआम आवाजाही और खाकी के एक वर्ग के ढुलमुल रवैये से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। पीड़ित परिवार और क्षेत्र के निवासियों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि किसी भी प्रभाव या दबाव को दरकिनार कर आरोपियों के खिलाफ कड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया जाए और मामले को दबाने की कोशिश कर रहे पुलिसकर्मियों पर भी सख्त कार्रवाई की जाए।



