पद्मश्री छुटनी महतो मुख्य अतिथि के रूप में हुई शामिल, कहा कि कोई भी पीड़ित महिला संपर्क करके सहायता प्राप्त कर सकती है


घाटशिला : सोना देवी विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर विवेकानन्द ऑडिटोरियम में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में पद्मश्री छुटनी महतो मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं. उन्होंने अपने संबोधन में बताया कि अशिक्षित होने के बावजूद उन्होंने डायन प्रथा जैसे अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जीवनभर संघर्ष किया. उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के कारण उन्हें कभी परिवार से भी दूर होना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद वे पीड़ित महिलाओं के समर्थन में लगातार काम कर रही हैं और जरूरतमंद महिलाओं को आश्रय देने का प्रयास करती हैं.

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई. सहायक कुलसचिव अर्चना सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों और सीएसआर गतिविधियों की जानकारी दी. अधिवक्ता ममता सिंह ने महिलाओं को उनके अधिकारों और कानूनों की जानकारी देते हुए लैंगिक समानता, समान कार्य के लिए समान वेतन तथा कार्यस्थल पर सुरक्षा से जुड़े कानूनों पर प्रकाश डाला. उन्होंने बाल विवाह निषेध अधिनियम, दहेज प्रताड़ना अधिनियम, घरेलू हिंसा अधिनियम और पॉश (POSH) कानून के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी.
कार्यक्रम में कोल्हान विश्वविद्यालय की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ रागिनी भूषण ने महिला सशक्तिकरण पर अपने विचार रखते हुए वेदों और पुराणों के संदर्भों का उल्लेख किया. वहीं विश्वविद्यालय की ट्रस्टी और पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ निर्मला शुक्ला ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए शिक्षा और समान अवसर बेहद जरूरी हैं. कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया और समाज में महिलाओं के सम्मान और अधिकारों को मजबूत करने पर बल दिया. अंत में कुलसचिव डॉ नित नयना ने धन्यवाद ज्ञापन किया और सामूहिक राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ.



