सिदगोड़ा में कथित वसूली मामले में नया मोड़, अवैध लॉटरी और मारपीट के आरोपों की जांच पर सवाल

जमशेदपुर:- जमशेदपुर के सिदगोड़ा में एसएसपी के नाम पर कथित वसूली के मामले में लोक आलोक की पड़ताल के दौरान एक नया मोड़ सामने आया है। जिस युवक को कथित वसूली के मामले से जोड़कर देखा जा रहा है, उसके संबंध में मिली जानकारी के अनुसार वह अवैध लॉटरी के कारोबार से जुड़े स्थान पर लॉटरी खेलने गया था। बताया जा रहा है कि लॉटरी में हारने के बाद युवक ने वहां वीडियो बनाना शुरू कर दिया, जिसके बाद मौके पर मौजूद कथित लॉटरी संचालकों ने उसके साथ मारपीट की। आरोप है कि इसके बाद युवक को डराया-धमकाया गया और उससे वीडियो बनवाया गया। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि पकड़ा गया युवक लॉटरी खेलने के लिए वहां पहुंचा था। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, लॉटरी में हारने के बाद युवक ने घटनास्थल का वीडियो बनाना शुरू कर दिया। इसी बात को लेकर वहां मौजूद कथित अवैध लॉटरी संचालक नाराज हो गए और युवक के साथ मारपीट की। प्रत्यक्षदर्शी ने दावा किया कि युवक को डराने-धमकाने के बाद उससे वीडियो बनवाया गया। इस बयान के बाद मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में पुलिस के लिए जरूरी है कि वीडियो की परिस्थितियों और घटना में शामिल सभी लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच करे।


इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि घटनास्थल पर अवैध लॉटरी का कारोबार चल रहा था, तो वहां मौजूद कथित संचालकों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? क्या पुलिस ने लॉटरी संचालन में शामिल लोगों की पहचान की? क्या घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए और युवक के साथ कथित मारपीट की जांच की गई? यदि एक युवक को पकड़कर पुलिस के हवाले किया गया, तो उस स्थान पर कथित रूप से चल रहे अवैध कारोबार की जांच और कार्रवाई की स्थिति भी सार्वजनिक होनी चाहिए थी जो कि खबर लिखे जाने तक नहीं किया गया है।
सिदगोड़ा में अवैध लॉटरी के संचालन को लेकर एक और गंभीर सवाल उठ रहा है कि आखिर यह कारोबार किसके सहारे चल रहा है? क्या स्थानीय स्तर पर संबंधित विभाग को इसकी जानकारी थी? यदि जानकारी थी, तो इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही मिल सकेगा।
मामले में एसएसपी का नाम लेकर कथित वसूली किए जाने की बात भी चर्चा में रही है। ऐसे में पुलिस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वास्तव में किसी ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का नाम लेकर रुपये मांगने की कोशिश की थी या फिर मामला लॉटरी खेलने और वीडियो बनाने को लेकर हुए विवाद से जुड़ा है। दोनों पहलुओं की अलग-अलग जांच जरूरी है, ताकि किसी भी पक्ष के आरोप को बिना प्रमाण सच न मान लिया जाए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो सके।
फिलहाल लोक आलोक की पड़ताल में सामने आई जानकारी ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। एक ओर युवक के साथ कथित मारपीट और दबाव में वीडियो बनवाने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर अवैध लॉटरी के कारोबार और उसके संचालकों पर कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, कथित अवैध लॉटरी कारोबार के संबंध में क्या कार्रवाई होती है और पूरे घटनाक्रम की सच्चाई क्या निकलकर सामने आती है।


