शिलपहाड़ी गांव में मनाया गया राष्ट्रीय वैज्ञानिक दृष्टिकोण दिवस, अंधविश्वास के खिलाफ दिखाई गई लघु फिल्में

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जमशेदपुर  :- राष्ट्रीय वैज्ञानिक दृष्टिकोण दिवस के अवसर पर 20 अगस्त को बिंदु चंदन ट्रस्ट फॉर ट्राइबल सेल्फ एंपावरमेंट संस्था की ओर से शिलपहाड़ी गांव में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में स्थानीय आदिवासी, सबर, बिरहोर और भूमिज समुदायों के युवाओं एवं बच्चों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

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कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण समाज में फैले अंधविश्वास जैसे डायन प्रथा, भूत-प्रेत, असमानता और टोना-टोटका जैसी कुरीतियों पर जागरूकता फैलाना था। इसके लिए लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया गया, जिसने ग्रामीणों को तार्किक सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया।

संस्था की शिवानी मरडीह ने इस मौके पर कहा कि “आज भी हमारा आदिवासी समाज डायन प्रथा, टोना-टोटका और नशे जैसी कुरीतियों से जूझ रहा है। यह हमारे समाज को पीछे धकेल रहा है। इसलिए युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना बहुत जरूरी है, ताकि वे विज्ञान और तर्कशीलता के आधार पर समाज को आगे ले जा सकें।”

गांव की पढ़ी-लिखी युवती कोईली सोरेन ने बच्चों को खेलों के माध्यम से तर्कशील सोच बढ़ाने की प्रेरणा दी और कहा कि “आज जब समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण कम होता जा रहा है, तब शिक्षा के जरिए इसे बचाए रखना बेहद जरूरी है।”

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. नरेंद्र दाभोलकर के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इस आयोजन में बड़ी संख्या में बच्चे और युवा उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को सफल बनाने में सुखलाल किस्कू, अर्जुन सोरेन, कुईली सोरेन, सिमोती बेसरा, मैया सोरेन और अंकुर शाश्वत की अहम भूमिका रही।

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