JSSC CGL फर्जीवाड़े की जांच तेज, संदिग्ध नेटवर्क पर SIT का शिकंजा






रांची : JSSC स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023 में कथित फर्जीवाड़े की जांच तेज हो गई है। सीआईडी की एसआईटी ने प्रमुख संदिग्ध अभय कुमार तिवारी, उसकी पत्नी सुषमा कुमारी और भाई अक्षय कुमार तिवारी को रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू की है। अभय को पांच दिन, जबकि सुषमा और अक्षय को दो-दो दिन की रिमांड पर लिया गया है। सीजीएल परीक्षा में सफल 18 संदिग्ध अभ्यर्थियों से भी पूछताछ की गई है और उनके बयानों का क्रॉस वेरिफिकेशन किया जा रहा है। अब तक 37 से अधिक संदिग्धों और आरोपियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।


एसआईटी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संदिग्ध अभ्यर्थियों ने किन परीक्षाओं में सफलता हासिल की, उन्हें किसने मदद पहुंचाई और इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे। पूछताछ में कई नए नाम भी सामने आए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि अभय कुमार तिवारी जेपीएससी परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड में मनोज कुमार तिवारी के नाम से मार्केटिंग मैनेजर के रूप में कार्यरत था। जेएसएससी सीजीएल के कथित पेपर लीक मामले में एक जनवरी 2025 को सीआईडी थाना में कांड संख्या 01/2025 दर्ज किया गया था।
इधर, 14वीं जेपीएससी प्रतियोगिता परीक्षा में अनुचित साधनों से सफलता हासिल करने के आरोपी उमाकांत उरांव, मनोज कुमार और रोशन केरकेट्टा की पांच दिन की पुलिस रिमांड शनिवार को समाप्त हो गई। कोर्ट के आदेश पर तीनों को न्यायिक हिरासत में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार भेज दिया गया। जांच में उमाकांत उरांव के अभ्यर्थी होने के साथ गिरोह के एजेंट के रूप में काम करने की बात सामने आई है। 14वीं जेपीएससी फर्जीवाड़ा मामले में तत्कालीन अध्यक्ष एल खियांग्ते समेत अब तक करीब दो दर्जन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।


