जमशेदपुर अदालत ने अलकायदा से जुड़े तीन आरोपियों को सबूत के अभाव में बरी किया, 9 साल बाद मुकदमे में दोषसिद्धि नहीं


जमशेदपुर: शहर की एक अदालत ने आरोपी मौलाना कलीमुद्दीन मुझाहिद, अब्दुल रहमान अली खान (कटकी) और अब्दुल सामी को अलकायदा से जुड़ी गतिविधियों वाले मामले में सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने यह फैसला इस आधार पर सुनाया कि प्रोसिक्यूशन (पुलिस/सरकार) पक्ष आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त और ठोस सबूत पेश नहीं कर सका।

यह मामला 2016 में बिस्टुपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज एक FIR से शुरू हुआ था, जिसमें आरोपियों पर ‘अलकायदा इन द इंडियन सबकांटिनेंट (AQIS)’ से संबंध रखने और स्थानीय युवाओं को प्रेरित करने का आरोप लगाया गया था। जांच के दौरान यह बताया गया कि कुछ कथित आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग जांच और पूछताछ भी की गई थी।
आरोपों में शामिल नामों में जमशेदपुर के साथ-साथ ओडिशा और हरियाणा क्षेत्रों से जुड़े लोग भी थे, जिनकी सदस्यता या साझेदारी को लेकर मुश्किल से किसी भी सही साबित सबूत अदालत तक पेश नहीं हो सका। कुल 16 गवाहों के बयान भी कोर्ट के सामने पर्याप्त साबित नहीं हुए। ऐसे में न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि आरोप खड़े करने के लिए कोई विश्वसनीय दस्तावेज या साक्ष्य नहीं हैं।
न्यायालय के फैसले में यह उल्लेख किया गया कि बिना ठोस प्रमाण के किसी व्यक्ति को आतंकी गतिविधियों से जोड़कर लगातार हिरासत में रखना या उसके खिलाफ कार्रवाई करना सही नहीं माना जा सकता। अदालत का फैसला इस बात की पुष्टि करता है कि वर्षों के लंबित मुकदमों में गवाहों या सबूतों की कमी आरोपी को बरी कर सकती है।
इस फैसले के बाद यह मुद्दा उठ रहा है कि आठ-नौ साल से चल रही जांच-पड़ताल और गिरफ्तारियों के बावजूद जब किसी पर आरोप सिद्ध नहीं हो पाते, तो ऐसे मामलों को लेकर कानूनी प्रक्रिया और पुलिस की ओर से पुनः पूछताछ/हिरासत व्यवस्था पर सवाल पूछे जा रहे हैं.



