टीबी मुक्त भारत अभियान में अब उच्च शिक्षण संस्थान भी सक्रिय, विद्यार्थियों को बनाया जाएगा निक्षय मित्र



JHARKHAND: देश के उच्च शिक्षण संस्थानों द्वारा टीबी मुक्त भारत अभियान चलाया जाएगा। इस संबंध में आज यूजीसी द्वारा देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों को टीबी मुक्त भारत के लिए जागरूकता पैदा करना विषय पर चेतना श्रृंखला व्याख्यान के संबंध में जानकारी दी गई। सोना देवी विश्वविद्यालय के विवेकानन्द आडिटोरियम में कुलपति डाॅ ब्रज मोहन पट पिंगुआ, कुलसचिव डाॅ नित नयना, परीक्षा नियंत्रक श्री मिथिलेश सिंह विभिन्न संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष तथा फैकल्टी के अलावे गैर शैक्षणिक कर्मचारियों तथा विद्यार्थियों ने इस व्याख्यान को देखा और सुंना।
टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत टीबी यानि तपेदिक को जड़ से खत्म करने के लिए सभी उच्च शिक्षा संस्थान अपने संकाय सदस्यों, छात्रों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को इस अभियान से जोड़ेंगे और इस अभियान का व्यापक प्रचार करेंगे। यूजीसी का टीबी मुक्त भारत अभियान उच्च शिक्षण संस्थानों में टीबी के प्रति जागरूकता फैलाने और इसे खत्म करने की एक संयुक्त पहल है।
इस अभियान का उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के माध्यम से युवाओं और समाज में टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इसकी स्क्रीनिंग करना है।
इस संबंध में आयोजित व्याख्यान में डाॅ राजन ने टीबी संक्रमण और रोग के बारे में बताया। साथ ही यह भी बताया कि रोगियों की पहचान करने के लिए जांच जरूरी है। उन्होंनें कहा कि संक्रमित व्यक्ति की उचित देखभाल करने से तपेदिक को जड़ से खत्म किया जा सकता है। उन्होंनें बताया कि यह बैक्टीरिया से फैलने वाला संक्रमण है जो हवा के माध्यम से फैलता हैं। इसलिए संक्रमित व्यक्ति को मास्क लगाने की आवश्यकता है। टीबी मरीज को अपने इम्यून सिस्टम को ठीक रखने तथा संतुलित पोषण युक्त आहार लेने की भी सलाह दी जाती है। यूजीसी ने शिक्षण संस्थानों और छात्रों को निक्षय मित्र के रूप में नामांकित करने और टीबी मरीजों को गोेद लेकर उनकी मदद करने का निर्देश दिया है। डाॅ राजन ने बताया कि सभी शिक्षण संस्थान अपने नजदीकी क्षेत्र में जाकर लोगों को टीबी रोग के लक्षण, उसके फैलने के कारण तथा बचाव के उपाय के बारे में लोगों को जागरूक करें तथा यह भी बतायें कि इस रोग से किस तरह के लोग जल्द संक्रमित होते हैं। उन्होंने टीबी के दस लक्षण भी बताये। इस अभियान का मकसद देश से टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए युवाओं की ऊर्जा और संस्थानों को जोड़ना है।
डाॅ राजन ने बताया कि इच्छुक विद्यार्थी को निक्षय मित्र के रूप में रजिस्ट्रेशन कराना है। इसके साथ ही उन्होंने संक्रमित मरीज को दी जाने वाली सहायता के बारे में बताते हुए कहा कि निक्षय पोषण के तहत पोषाहार उपलब्ध कराया जाता है तथा एक हजार रूपये की सहायता भी दी जाती है। इस संबंध में सारी जानकारी टीबी मुक्त भारत एप पर उपलब्ध है। यूनिवर्सिटी और काॅलेज विद्यार्थियों को निक्षय मित्र बनाकर अभियान से जोड़ेगे तथा सोशल मीडिया के माध्यम से भी टीबी रोकथाम के लिए लोगों को जागरूक करेंगे। निक्षय मित्र के लिए यूथ एंबेस्डर बनाये जायेंगे तथा टीबी मुक्त भारत अभियान को लेकर लोगों को जागरूक करने में एनएसएस के कार्यकर्ता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे। लोगों को टीबी से जंग जीतने के लिए शपथ के माध्यम से भी जागरूक किया जाएगा। डाॅ राजन के कहा कि टीबी हारेगा देश जीतेगा।




