जस्टिस गवई से मिले गले, हिंदी में ली शपथ

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दिल्ली : जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राष्ट्रपति भवन में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. खास बात यह रही कि उन्होंने शपथ हिंदी में ली. इस शपथ ग्रहण समारोह में भावनात्मक क्षण भी देखने को मिले. शपथ लेने के तुरंत बाद, उन्होंने अपने पूर्ववर्ती CJI जस्टिस बी.आर. गवई से गर्मजोशी से गले मिलकर अभिवादन किया.इस बार का शपथ ग्रहण ऐतिहासिक रहा क्योंकि इसमें छह देशों- भूटान, केन्या, मलेशिया, मॉरिशस, नेपाल और श्रीलंका के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के जज शामिल हुए. यह पहली बार है कि किसी भारतीय CJI के शपथ ग्रहण में बड़ा विदेशी न्यायिक प्रतिनिधिमंडल मौजूद रहा.हरियाणा के हिसार जिले में जन्मे जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल 9 फरवरी 2027 तक रहेगा. उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कानून में स्नातकोत्तर किया और हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे. अपने करियर में उन्होंने कई अहम फैसलों में भूमिका निभाई है, जिनमें अनुच्छेद 370 निरस्तीकरण, पेगासस स्पाइवेयर जांच, राजद्रोह कानून को स्थगित करने का आदेश और बार एसोसिएशन में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीट आरक्षित करने का निर्देश शामिल है.CJI बी. आर. गवई के 65 वर्ष की आयु पूरी होने पर आज वे सेवानिवृत्त हो गए. सेवानिवृत्ति से पहले उन्होंने परंपरा को जारी रखते हुए वरिष्ठतम न्यायाधीश को अपना उत्तराधिकारी चुना. इस समय न्यायपालिका और सरकार के बीच कई संवेदनशील मुद्दे लंबित हैं, ऐसे में जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों को कम करना, न्यायिक सुधारों को गति देना और न्यायपालिका की पारदर्शिता बढ़ाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है.

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