मौत का पुल” बना गनसा–सिदरा की किस्मत: 10 साल से खंडहर, प्रशासन और जनप्रतिनिधि दोनों मौन!….जल्द होगी जांच, शुरू होगा निर्माण कार्य :डीसी संदीप कुमार


महुआडांड़ (लातेहार): प्रखंड के गनसा और सिदरा गांव के बीच बना पुल अब विकास नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही की मिसाल बन चुका है। पिछले 10 वर्षों से यह पुल जर्जर और टूटा हुआ पड़ा है, लेकिन जिम्मेदारों की चुप्पी आज भी बरकरार है। हालात इतने खतरनाक हैं कि ग्रामीण रोज अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि खुली उपेक्षा और गैर-जिम्मेदारी है। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि अब पूरी तरह नदारद हैं। न कोई निरीक्षण, न कोई योजना—सिर्फ आश्वासन और जमीनी स्तर पर शून्य काम।सबसे ज्यादा प्रभावित किसान हैं, जिनकी खेती नदी के दोनों किनारों पर फैली है। पुल नहीं होने के कारण उन्हें लंबा और खतरनाक रास्ता तय करना पड़ता है। बरसात के समय नदी उफान पर रहती है, जिससे यह सफर और भी जानलेवा बन जाता है। कई बार हादसे होते-होते बचे हैं, लेकिन प्रशासन अब तक गंभीर नहीं दिखा।शिक्षा व्यवस्था भी इससे बुरी तरह प्रभावित हो रही है। गनसा स्थित राजकीय विद्यालय जाने वाले बच्चों के पास कोई सुरक्षित रास्ता नहीं है। मासूम बच्चे रोज कीचड़, गड्ढों और तालाब किनारे होकर स्कूल पहुंचते हैं। बारिश के दिनों में यह रास्ता पूरी तरह खतरे में बदल जाता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द पुल निर्माण शुरू नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की होगी।
*जल्द होगी जांच, शुरू होगा निर्माण कार्य :डीसी संदीप कुमार*
लातेहार के उपायुक्त संदीप कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि उन्हें पुल की स्थिति की जानकारी मिली है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही स्थल की जांच कर पुल निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।



