हिमांशु के कथित वीडियो पर सोशल मीडिया में बहस तेज, सरकारी नौकरी और कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल






आदित्यपुर। चर्चित हिमांशु हत्याकांड के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे हिमांशु के फेसबुक अकाउंट से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। इसके बावजूद वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और सरकारी नियुक्ति, कानून-व्यवस्था तथा अपराध नियंत्रण को लेकर बहस तेज हो गई है।


वायरल पोस्ट में एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा है कि वह वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता, लेकिन यदि वीडियो वास्तविक है तो जन्मदिन के मौके पर हथियार से फायरिंग करने वाला व्यक्ति “शरीफ नहीं हो सकता”। पोस्ट में यह भी कहा गया है कि घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और हत्या के आरोपियों को गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जानी चाहिए। पोस्ट में इसे ही न्याय बताया गया है।
सोशल मीडिया पोस्ट में हाल ही में इस मामले में हुई प्रशासनिक कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि घटना के बाद कथित लापरवाही के आरोप में चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया तथा दो जिलों के आईपीएस अधिकारियों को लाइन हाजिर किया गया। पोस्ट में पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल कुमार मुर्मू के उस बयान का भी जिक्र किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “चेहरे बदलने से व्यवस्था नहीं बदलेगी”। इसके संदर्भ में पोस्ट करने वाले ने मांग की है कि वायरल वीडियो की सत्यता की जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो मृतक के परिजनों को दी गई या प्रस्तावित सरकारी नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाए।
पोस्ट में झारखंड आईपीएस एसोसिएशन से भी अपील की गई है कि यदि वीडियो की जांच में तथ्य सही पाए जाते हैं तो अपराधी प्रवृत्ति के लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी जैसी सुविधाएं दिए जाने का विरोध किया जाए। साथ ही यह भी तर्क दिया गया है कि ऐसी व्यवस्था से अपराधियों का मनोबल बढ़ सकता है। पोस्ट के अंत में व्यवस्था और हालात में बदलाव की जरूरत पर भी जोर दिया गया है।
इधर, वायरल वीडियो और उससे जुड़े दावों को लेकर प्रशासन या पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वीडियो की प्रामाणिकता तथा उसमें किए जा रहे दावों की अब तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।


