मरांगबुरु के संरक्षण पर सम्मेलन, 4-5 नवंबर के महासम्मेलन की रणनीति पर चर्चा


जमशेदपुर : असम के गुवाहाटी स्थित साहित्य सभा भवन में रविवार को मरांगबुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा का राज्य स्तरीय सम्मेलन हुआ। ऑल असम माझी मंडल के अध्यक्ष दिपेन मुर्मू की अध्यक्षता में हुए सम्मेलन में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए प्रतिनिधियों ने आदिवासी अस्तित्व, पहचान और धार्मिक-सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण पर चर्चा की। गिरिडीह के मधुबन में 4 और 5 नवंबर को प्रस्तावित ‘मरांगबुरु धोरोमगाढ़ महासम्मेलन’ की तैयारी और रणनीति पर भी विचार किया गया। महासम्मेलन की तारीख और असम में इसकी तैयारी से जुड़ी जानकारी अन्य हालिया रिपोर्टों में भी सामने आई है।


मोर्चा के महासचिव हीरालाल माझी ने कहा कि मरांगबुरु आदिवासी संताल समाज का पारंपरिक धार्मिक स्थल है और गिरिडीह स्थित मरांगबुरु (पारसनाथ) को प्रकृतिपूजक आदिवासी समाज अपना आराध्य मानता है। उन्होंने दावा किया कि यहां संताल समाज का ऐतिहासिक जुग जाहेरथान है, जहां पारंपरिक धार्मिक आयोजन होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मरांगबुरु पारसनाथ को लेकर सरकार और अदालत को दिग्भ्रमित किया जा रहा है और कहा कि आदिवासी समाज अपने धार्मिक और पारंपरिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाता रहेगा।
सम्मेलन के दौरान मरांगबुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा की असम प्रदेश कमेटी भी बनाई गई। दिपेन मुर्मू को अध्यक्ष, महावीर बास्के को महासचिव, बिकुल हांसदा को कोषाध्यक्ष और सोपान हेंब्रम को प्रवक्ता बनाया गया। सलाहकार मंडल में असम विधानसभा के पूर्व स्पीकर पृथ्वी माझी समेत अन्य लोगों को शामिल किया गया। कार्यक्रम में सोमाय टुडू, दुर्गाचरण मुर्मू, नवीन मुर्मू, बिंदे सोरेन समेत कई प्रतिनिधि मौजूद रहे। आयोजकों ने देशभर के आदिवासियों से 4 और 5 नवंबर के महासम्मेलन में शामिल होने की अपील की।


