सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति में अनियमितता का आरोप, राज्यपाल से जांच की मांग

रांची : रांची विश्वविद्यालय के व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में छह संविदा सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। विश्वविद्यालय के पूर्व सीनेट सह सिंडिकेट सदस्य डॉ अटल पांडेय ने राज्यपाल को आवेदन देकर नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। उन्होंने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी, अकादमिक प्रदर्शन संकेतक (एपीआई) अंकों की संशोधित सूची सार्वजनिक नहीं करने और आरक्षण रोस्टर के अनुपालन को लेकर शिकायत की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। आवेदन के अनुसार, विश्वविद्यालय के व्यावसायिक अध्ययन केंद्र ने 23 अप्रैल को एमबीए और बीबीए के छह पूर्णकालिक संविदा सहायक प्राध्यापक पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। इनमें एमबीए मानव संसाधन के दो, एमबीए वित्त के दो, एमबीए सूचना प्रौद्योगिकी का एक और बीबीए वित्त का एक पद शामिल था। इन पदों के लिए 27 जुलाई को साक्षात्कार हुआ और सितंबर के अंतिम सप्ताह में चयन सूची जारी की गई।


डॉ अटल पांडेय का आरोप है कि 22 तारीख को जारी एपीआई अंकों की मेधा सूची में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों का चयन नहीं हुआ। इसके बजाय पांचवें, सातवें, दसवें, 17वें, 28वें और 40वें स्थान पर रहे अभ्यर्थियों को चुना गया। उनके अनुसार, विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने बताया कि दस्तावेज सत्यापन के दौरान अभ्यर्थियों के एपीआई अंकों में बदलाव हुआ था और पहले जारी सूची अस्थायी थी। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया कि संशोधित सूची सार्वजनिक किए बिना अंतिम चयन परिणाम क्यों जारी किया गया। उन्होंने झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के वर्ष 2018 के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि संबंधित प्रावधान में प्रत्येक पद के लिए दस्तावेज सत्यापन में पांच गुना और साक्षात्कार में तीन गुना अभ्यर्थियों को बुलाने का उल्लेख है। उन्होंने आरक्षण रोस्टर के अनुपालन और विषयवार विशेषज्ञता की जानकारी सार्वजनिक नहीं करने का भी आरोप लगाया।
डॉ अटल पांडेय ने राज्यपाल से एपीआई अंकों की प्रारंभिक और संशोधित सूची, चयन समिति का कार्यवृत्त, अभ्यर्थियों के अकादमिक एवं साक्षात्कार अंक और सभी छह पदों का रोस्टर रजिस्टर सार्वजनिक कराने की मांग की है। उन्होंने पूरी नियुक्ति प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने और अनियमितता मिलने पर चयन प्रक्रिया की समीक्षा कर नियमानुसार कार्रवाई करने का आग्रह किया है। इसके अलावा विश्वविद्यालय के विधि अध्ययन संस्थान (आईएलएस) में हुई नियुक्तियों की प्रक्रिया की भी जांच कराने की मांग की है।


