गांवों की तस्वीर बदल रहा किताबों का मॉडल, आज राष्ट्रीय मंच पर संजय कच्छप का बड़ा खुलासा



चाईबासा :झारखंड के सुदूर ग्रामीण और वंचित समुदायों में पढ़ने की संस्कृति को जन-अभियान बनाने वाले ‘लाइब्रेरी मैन ऑफ झारखंड’ संजय कच्छप 11 अगस्त को राजस्थान के झुंझुनू स्थित बगर के पिरामल स्कूल ऑफ लीडरशिप में आयोजित विशेष कार्यक्रम में मुख्य वक्ता होंगे। पिरामल फाउंडेशन ने उन्हें देशभर से आए प्रतिनिधियों के सामने झारखंड के सामुदायिक एवं डिजिटल पुस्तकालय मॉडल की सफलता और काम करने के तरीके को साझा करने के लिए आमंत्रित किया है।


इस मॉडल की खासियत केवल पुस्तकालय स्थापित करना नहीं, बल्कि बच्चों और युवाओं के लिए संवाद, करियर काउंसलिंग और सामाजिक बदलाव का केंद्र तैयार करना है। स्थानीय लोगों की भागीदारी से बनाए गए इन पुस्तकालयों को आधुनिक डिजिटल संसाधनों से जोड़ा जाता है, जिससे बच्चों में नियमित पढ़ाई की आदत विकसित हो। पिरामल फाउंडेशन ने ग्रामीण, आदिवासी और वंचित वर्गों तक किताबों, करियर मार्गदर्शन, सीखने के संसाधनों और डिजिटल शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के उनके प्रयासों की सराहना की है। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और विकास क्षेत्र के विशेषज्ञ सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी और टिकाऊ बनाने पर चर्चा करेंगे।


