जर्जर स्कूल भवनों का तत्काल निरीक्षण कराएं, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

रांची : झारखंड हाइकोर्ट ने राज्य के सरकारी विद्यालयों की बदहाल स्थिति, शिक्षकों की कमी और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षतावाली खंडपीठ ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और उनके शिक्षा के अधिकार से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता। खंडपीठ ने अधिकारियों को किसी अप्रिय घटना का इंतजार करने के बजाय जर्जर विद्यालय भवनों का तत्काल भौतिक निरीक्षण करने का निर्देश दिया।


खंडपीठ ने राज्य सरकार और झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेइपीसी) को स्कूलों की वर्तमान स्थिति, जर्जर भवनों के मरम्मत कार्य और शिक्षकों के रिक्त पदों की विस्तृत जानकारी के साथ शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत यह भी देखेगी कि किन विद्यालयों के भवनों की स्थिति गंभीर है और किन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी सबसे अधिक है।
मामले की अगली सुनवाई पांच नवंबर को होगी। राज्य के कई सरकारी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं और सैकड़ों विद्यालय एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई विद्यालयों के भवन भी जर्जर अवस्था में हैं और उनकी तत्काल मरम्मत की जरूरत है।


