आदित्यपुर नगर निगम की अनदेखी से खरकाई के अस्तित्व पर मंडराया संकट, प्रतिबंधित 100 मीटर के दायरे में डंप किया जा रहा कचरा, NGT के नियमों की उड़ रही धज्जियां; बीमारी और हादसों की आशंका से सहमे लोग

आदित्यपुर :- सरायकेला-खरसावां जिले के सबसे प्रमुख औद्योगिक और आवासीय केंद्र आदित्यपुर में सफाई व्यवस्था की बदहाली अब एक बड़े पर्यावरणीय और जन-स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुकी है। स्थिति इस कदर बिगड़ चुकी है कि स्थानीय नागरिक आक्रोश और लाचारी में आदित्यपुर ‘नगर निगम’ को ‘नरक निगम’ कहकर पुकारने लगे हैं। सबसे गंभीर मामला सरायकेला और जमशेदपुर की जीवन रेखा मानी जाने वाली खरकाई नदी के किनारे धड़ल्ले से किए जा रहे कचरा डंपिंग का है, जिससे नदी के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।

हाल ही में उड़ीसा स्थित बैंकबिल और खरकाई डैम के गेट खोले जाने के साथ-साथ हुई बारिश के कारण खरकाई नदी का पानी साफ हुआ था और नदी को नया जीवन मिला था। लेकिन नगर निगम की लापरवाही के कारण नदी के इस प्राकृतिक निखार पर ग्रहण लग गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त निर्देशों के अनुसार नदी तट के 100 मीटर के दायरे में किसी भी तरह का कचरा डंप करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद निगम प्रशासन द्वारा इसी प्रतिबंधित दायरे में शहरभर का सड़ता कचरा गिराया जा रहा है।
नदी के पास स्थित ‘राधास्वामी मार्ग’ पर रोजाना सुबह-शाम टहलने निकलने वाले स्थानीय लोगों को कचरे के ढेर से उठने वाली तीव्र दुर्गंध के कारण वहां से गुजरना भी दुभर हो गया है।
डंपिंग के पीछे अवैध वसूली और प्लॉटिंग का बड़ा खेल!
स्थानीय सूत्रों और रिपोर्ट्स के अनुसार, नदी किनारे कचरा डंप करने का यह खेल सिर्फ सफाई व्यवस्था की नाकामी भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित गठजोड़ काम कर रहा है। आरोप है कि कचरा गिराने के एवज में अवैध वसूली की जा रही है। रसूखदारों और कुछ अधिकारियों की शह पर कचरे से नदी किनारे की खाली जमीनों को भरकर अवैध प्लॉटिंग का धंधा चल रहा है। अगर समय रहते खरकाई नदी को बचाने के लिए जिला प्रशासन और नगर निगम ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह ऐतिहासिक नदी कचरे के ढेर के नीचे हमेशा के लिए दफन हो जाएगी और पूरे क्षेत्र में गंभीर स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति बन जाएगी।


