बार काउंसिल चुनाव विवाद में बड़ा फैसला, महेश तिवारी की उम्मीदवारी रद्द करने का आदेश निरस्त






रांची : झारखंड स्टेट बार काउंसिल चुनाव विवाद में हाई पावर्ड इलेक्शन सुपरवाइजरी कमेटी ने महेश तिवारी की उम्मीदवारी रद्द करने वाले रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए निरस्त कर दिया है। पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति ने 20 अगस्त 2026 को यह आदेश पारित किया। समिति में पूर्व पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रवि शंकर झा और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरी भी शामिल हैं।


महेश तिवारी बार काउंसिल सदस्य पद के उम्मीदवार थे। 30 मार्च 2026 को रांची की अदालत ने उन्हें आईपीसी की धाराओं 323, 341, 354, 504 और 506 के तहत दोषी ठहराया था। इसके बावजूद 21 अप्रैल को उन्होंने जीत के लिए जरूरी कोटा हासिल किया और विजयी घोषित हुए। बाद में 24 अप्रैल को मुख्य रिटर्निंग ऑफिसर ने दोषसिद्धि का हवाला देते हुए उनकी उम्मीदवारी रद्द कर प्रयाग महतो को निर्वाचित घोषित कर दिया था। समिति ने कहा कि नामांकन वैध रूप से स्वीकार होने और मतगणना शुरू होने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर किसी उम्मीदवार को बीच में अयोग्य घोषित नहीं कर सकता। इसी आधार पर 24 अप्रैल और 18 मई के आदेश रद्द किए गए।
समिति ने स्पष्ट किया कि दोषसिद्धि के बाद महेश तिवारी सदस्य बने रह सकते हैं या नहीं, इसका अंतिम फैसला चुनाव न्यायाधिकरण करेगा। बार काउंसिल ऑफ इंडिया को सभी दस्तावेजों के साथ मामला न्यायाधिकरण के समक्ष रखने का निर्देश दिया गया है। तब तक विवादित एक सीट खाली रखी जाएगी और अंतिम निर्णय न्यायाधिकरण के आदेश के बाद लागू होगा।


