BCCL की माइनिंग रोकने की कोशिश को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की याचिका की खारिज






धनबाद : जामाडीह मौजा की 141.50 एकड़ जमीन पर BCCL की माइनिंग रोकने के मामले में झारखंड सरकार को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने राज्य सरकार की याचिका खारिज करते हुए कहा कि इसमें कोई मेरिट नहीं है। सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट के नवंबर 2024 के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें BCCL के पक्ष में निर्णय देते हुए माइनिंग रोकने से जुड़े राज्य सरकार के दोनों आदेश रद्द कर दिए गए थे।इस विवाद की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी। राज्य सरकार ने 25 अगस्त 2010 को जामाडीह मौजा की 141.50 एकड़ जमीन को संरक्षित वन भूमि बताते हुए वहां माइनिंग बंद करने का आदेश दिया था। इसके बाद 17 अगस्त 2016 को संशोधित आदेश जारी कर प्लॉट नंबर 437, 230 और 419 को वन भूमि के दायरे से बाहर कर दिया गया। BCCL ने दोनों आदेशों के खिलाफ हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं।BCCL का पक्ष था कि विवादित जमीन पहले बंगाल कोल कंपनी के अधीन थी और कोयला उद्योग के राष्ट्रीयकरण के बाद केंद्र सरकार व कोयला मंत्रालय के नियंत्रण में आ गई। कंपनी ने कहा कि इस भूमि पर पहले से माइनिंग होती रही है। वहीं राज्य सरकार ने भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 29(3) का हवाला देते हुए इसे संरक्षित वन भूमि बताया था और बिना अनुमति खनन को गैरकानूनी कहा था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य सरकार की याचिका खारिज होने के बाद हाईकोर्ट का BCCL के पक्ष वाला फैसला बरकरार रहेगा.




