विश्व आपातकालीन चिकित्सा दिवस 2026: स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा और सम्मान की अपील

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JHARKHAND: इमरजेंसी डिपार्टमेंट (ईडी) किसी भी अस्पताल में मरीजों के लिए पहला संपर्क बिंदु होता है और इसे अक्सर अस्पताल का हृदय कहा जाता है। 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन कार्यरत यह विभाग हार्ट अटैक, स्ट्रोक, गंभीर चोट, श्वसन की समस्या और सेप्सिस जैसी जानलेवा स्थितियों से जूझ रहे मरीजों को तत्काल उपचार प्रदान करता है। अस्पताल में होने वाले लगभग आधे भर्ती मामलों में इमरजेंसी डॉक्टर महत्वपूर्ण निर्णय लेने की भूमिका निभाते हैं, जो स्वास्थ्य सेवाओं में ईडी की केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है। इमरजेंसी डिपार्टमेंट आपदाओं, महामारी और जनस्वास्थ्य आपात स्थितियों के दौरान भी सबसे पहली प्रतिक्रिया देने वाली इकाई के रूप में कार्य करता है।

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प्रतिवर्ष 27 मई को मनाया जाने वाला विश्व आपातकालीन चिकित्सा दिवस एक वैश्विक पहल है, जिसका उद्देश्य किसी भी अस्पताल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट की भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। वर्ष 1994 में यूरोपियन सोसाइटी फॉर इमरजेंसी मेडिसिन की स्थापना के उपलक्ष्य में शुरू किए गए इस दिवस का उद्देश्य दुनिया भर में समय पर, प्रभावी और समान रूप से आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता के महत्व को रेखांकित करना है।

आपातकालीन चिकित्सा आज भले ही चिकित्सा विज्ञान की एक महत्वपूर्ण विशेषज्ञता के रूप में स्थापित हो चुकी हो, लेकिन इसका संगठित इतिहास अपेक्षाकृत नया है। वर्ष 1991 में आधिकारिक रूप से स्थापित इंटरनेशनल फेडरेशन फॉर इमरजेंसी मेडिसिन (आईएफईएम) ने इस चिकित्सा शाखा को विश्वभर में बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसकी शुरुआत वर्ष 1986 में आयोजित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन इमरजेंसी मेडिसिन से जुड़ी है, जहां विश्वभर के विशेषज्ञों ने आकस्मिक चिकित्सा देखभाल के लिए एक व्यवस्थित व्यवस्था की परिकल्पना की थी। भारत में इमरजेंसी मेडिसिन की शुरुआत वर्ष 1995 में एक विशेष चिकित्सा शाखा के रूप में हुई, जिसमें ट्रॉमा केयर, क्रिटिकल केयर, टॉक्सिकोलॉजी, रेससिटेशन और आपातकालीन प्रक्रियाओं का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।

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विश्व आपातकालीन चिकित्सा दिवस 2026 की थीम “सेफ स्पेस फॉर इमरजेंसी मेडिसिन टीम्स – स्टॉप वायलेंस एवरीवेयर” स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े एक गंभीर और बढ़ते हुए मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित करती है, जो है स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा। यह थीम सुरक्षित कार्य वातावरण, चिकित्सा कर्मियों के प्रति सम्मान और किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार के प्रति शून्य सहनशीलता की आवश्यकता को रेखांकित करती है। इमरजेंसी डिपार्टमेंट, जो किसी भी संकट की स्थिति में मरीजों के लिए पहला सहारा होता है, इस प्रकार की घटनाओं के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील रहता है। अत्यधिक तनाव, मरीजों के परिजनों की भावनात्मक व्यथा और अस्पतालों में बढ़ती भीड़ जैसी परिस्थितियां कई बार हिंसक घटनाओं का कारण बन जाती हैं। ऐसे में यह थीम न केवल स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का संदेश देती है, बल्कि समाज से उनके प्रति संवेदनशीलता, सहयोग और सम्मान बनाए रखने की अपील भी करती है।

आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं से जुड़ी जिम्मेदारियां जितनी महत्वपूर्ण हैं, चुनौतियां भी उतनी ही गंभीर हैं। अस्पतालों में बढ़ती भीड़, सीमित संसाधन और मरीजों की अत्यधिक संख्या स्वास्थ्यकर्मियों पर निरंतर मानसिक और शारीरिक दबाव बनाती है, जिससे तनाव और बर्नआउट जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा ने स्थिति को और अधिक चिंताजनक बना दिया है। भारत में किए गए विभिन्न अध्ययनों से यह सामने आया है कि बड़ी संख्या में डॉक्टर किसी न किसी रूप में हिंसा का सामना कर चुके हैं, जिसमें मौखिक दुर्व्यवहार से लेकर शारीरिक हमले तक शामिल हैं। ऐसी घटनाएं केवल व्यक्तिगत स्तर पर नुकसान नहीं पहुंचातीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और कार्यप्रणाली को भी प्रभावित करती हैं। साथ ही, इससे मरीजों और चिकित्सा व्यवस्था के बीच विश्वास भी कमजोर होता है। इसलिए सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण सुनिश्चित करना आज स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे बड़ी आवश्यकताओं में से एक बन गया है।

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इस गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए भारत की कानूनी व्यवस्था स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए विभिन्न प्रावधान उपलब्ध कराती है। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा, हमला, आपराधिक धमकी तथा संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत दंडनीय अपराध हैं। कोविड 19 महामारी के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों पर बढ़ते हमलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने महामारी रोग (संशोधन) अधिनियम, 2020 लागू किया, जिसके तहत स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा को संज्ञेय और गैर जमानती अपराध घोषित किया गया। इस कानून में दोषी पाए जाने पर तीन महीने से लेकर सात वर्ष तक के कारावास, जुर्माना तथा नुकसान की भरपाई का प्रावधान किया गया है। चूंकि भारत में स्वास्थ्य सेवा राज्य का विषय है, इसलिए विभिन्न राज्यों में कानूनों और सुरक्षा प्रावधानों में कुछ भिन्नताएं देखने को मिल सकती हैं। इसी दिशा में हाल के वर्षों में प्रस्तावित हेल्थकेयर वर्कर्स प्रोटेक्शन बिल जैसे प्रयास स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने, सख्त दंड सुनिश्चित करने तथा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल कानूनी आवश्यकता ही नहीं, बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी भी है। सुरक्षित और संरक्षित कार्य वातावरण चिकित्सा पेशेवरों को भयमुक्त होकर बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान करने में सक्षम बनाता है, जिससे मरीजों के उपचार के परिणाम बेहतर होते हैं और संपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत होती है। स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा जैसी घटनाओं को रोकने के लिए जनजागरूकता, सामुदायिक सहभागिता और संस्थागत सुरक्षा उपायों को साथ मिलकर कार्य करना होगा। समाज में आपसी सम्मान, विश्वास और संवेदनशीलता को बढ़ावा देकर ही स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और मरीजों के बीच सकारात्मक संबंध स्थापित किए जा सकते हैं।

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टाटा मेन हॉस्पिटल का इमरजेंसी डिपार्टमेंट (ईडी) एक समर्पित और दक्ष टीम के माध्यम से हर प्रकार के गंभीर मरीजों का उपचार करता है। इस टीम में मेडिकल ऑफिसर्स, इमरजेंसी मेडिसिन विशेषज्ञ, जनरल फिजिशियन, जनरल सर्जन तथा अस्पताल के अन्य सभी विभागों के विशेषज्ञों की 24×7 उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। यह विभाग प्रतिदिन 200 से अधिक मरीजों का इलाज करता है, जबकि मौसमी परिस्थितियों या विशेष समय में यह संख्या 500 से भी अधिक पहुंच जाती है। विभाग को हर समय आपदा प्रबंधन के लिए तैयार रखने हेतु नियमित प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल आयोजित किए जाते हैं। साथ ही, विभाग की कार्यक्षमता और सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक कठोर क्वालिटी एश्योरेंस प्रोग्राम भी संचालित किया जाता है।

विश्व आपातकालीन चिकित्सा दिवस के अवसर पर उन सभी आपातकालीन चिकित्सा पेशेवरों के समर्पण और सेवाभाव को सम्मान देना अत्यंत आवश्यक है, जो कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में निरंतर कार्य करते हुए अनगिनत जिंदगियां बचाते हैं। उनका अथक प्रयास और प्रतिबद्धता ही एक मजबूत और सक्षम स्वास्थ्य व्यवस्था की आधारशिला है। भविष्य की ओर देखते हुए, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को और सुदृढ़ बनाना तथा स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए। सुरक्षित कार्य वातावरण और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं ही एक संवेदनशील, भरोसेमंद और मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेंगी।

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