संघर्ष से स्वावलंबन तक : निर्मला एक्का बनीं ग्रामीण महिलाओं की प्रेरणा

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महुआडांड़: महुआडांड़ प्रखंड के दुरूप पंचायत अंतर्गत हरतुआ गाँव की रहने वाली निर्मला एक्का आज ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और संघर्ष की मिसाल बन चुकी हैं। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने हौसले और मेहनत के दम पर न सिर्फ अपने परिवार को संभाला, बल्कि बेटियों के बेहतर भविष्य की मजबूत नींव भी रखी।पति रंजीत खलखो और चार बेटियों के साथ संघर्षपूर्ण जीवन जी रही निर्मला के सामने आर्थिक चुनौतियाँ हमेशा बनी रहीं। इसी बीच ग्रामसभा द्वारा उनका चयन मनरेगा महिला मेट के रूप में किया गया, जिसने उनके जीवन को नई दिशा दी। इसके बाद उन्होंने लीड्स संस्था द्वारा आयोजित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाई। प्रशिक्षणों से उनमें नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास का विकास हुआ।निर्मला ने केवल महिला मेट की जिम्मेदारी तक खुद को सीमित नहीं रखा। वे गाँव की महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष भी बनीं। समूह के माध्यम से उन्हें 100 अंडा देने वाली मुर्गियाँ और एक शेड उपलब्ध कराया गया, जिससे उन्होंने मुर्गी पालन व्यवसाय की शुरुआत की। मेहनत और लगन से शुरू किया गया यह छोटा व्यवसाय आज उनके परिवार की आय का मजबूत सहारा बन चुका है। मुर्गी पालन से उन्हें सालाना करीब 50 हजार रुपए की आमदनी होती है। इसके अलावा खेती-बाड़ी, मौसमी सब्जी उत्पादन और मनरेगा कार्यों से भी वे लगभग 25 हजार रुपए तक की अतिरिक्त आय अर्जित कर लेती हैं निर्मला की सबसे बड़ी प्राथमिकता उनकी बेटियों की शिक्षा है। उनकी बड़ी बेटी कॉलेज में बी.ए. की पढ़ाई कर रही है और निर्मला चाहती हैं कि वह आगे चलकर शिक्षक प्रशिक्षण लेकर शिक्षिका बने। वहीं उनकी तीन छोटी बेटियाँ मिडिल स्कूल में अध्ययनरत हैं। निर्मला का सपना है कि सभी बेटियाँ उच्च शिक्षा प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनें और किसी न किसी व्यावसायिक प्रशिक्षण से जुड़कर अपने पैरों पर खड़ी होंदिनभर खेत, घर और व्यवसाय की जिम्मेदारियों के बीच व्यस्त रहने वाली निर्मला के चेहरे पर संघर्ष से ज्यादा उम्मीद दिखाई देती है। उनका मानना है कि शिक्षा और आत्मनिर्भरता ही बेटियों के जीवन को नई दिशा दे सकती है।आज निर्मला एक्का अपने गाँव और आसपास के क्षेत्रों की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि मजबूत इरादे, कठिन परिश्रम और सही मार्गदर्शन के सहारे कोई भी महिला अपने परिवार और समाज की तस्वीर बदल सकती है।

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