32 करोड़ निकासी मामला: चुनावी भुगतान के नाम पर बड़ा खुलासा, सिस्टम पर सवाल


पूर्वी सिंहभूम : जिले के कोषागार से करीब 32 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का बड़ा मामला सामने आने से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है. शुरुआती जानकारी के अनुसार, सरकारी खजाने से यह रकम गलत तरीके से निकाली गई, जिसके बाद पूरे वित्तीय सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं.

वित्त विभाग ने जमशेदपुर में कथित अनियमितता पर कोषागार पदाधिकारी से रिपोर्ट मांगी थी। कोषागार पदाधिकारी ने एसएसपी से जानकारी ली। सारा लेनदेन एसएसपी के करंट अकाउंट से हुआ।मामला 2020-21 से 2026-27 तक का है। अधिकारियों का कहना है कि यह बोकारो और हजारीबाग जैसा घोटाला नहीं है। यहां कोई अवैध बिल वाउचर पास नहीं हुआ। पैसा सही काम में खर्च हुआ, लेकिन तरीका वित्तीय नियमावली के अनुरूप नहीं था।शुरू में निकासी 10 से 15 करोड़ आंकी गई थी, लेकिन एसएसपी की रिपोर्ट में यह करीब तीन गुना अधिक निकली।
पूर्वी सिंहभूम में निकाली गई राशि चुनाव के दौरान वाहन चालकों को भुगतान के लिए थी। चुनाव में एक साथ 300-400 वाहनों का अधिग्रहण कर सुरक्षा कर्मियों को भेजा जाता है। कम समय में सभी चालकों को भुगतान करना होता है, जिससे आईडी जेनरेट करना संभव नहीं होता. इसलिए एसपी कोषागार से राशि अपने करंट खाते में ट्रांसफर कर चेक व बिल के जरिए भुगतान करते हैं.इसके अलावा एक बार नए सब इंस्पेक्टरों को वेतन मद में 38 लाख का भुगतान हुआ था. वित्त विभाग ने 2018-19 से हिसाब मांगा है, लेकिन 2018-19 और 2019-20 का हिसाब नहीं मिला.ऑडिट के बाद कागजात संभालकर नहीं रखे जाने के कारण दस्तावेज नहीं मिल रहे, मिलने पर हिसाब भेजा जाएगा.
अधिकारियों के मुताबिक, इस तरह की बड़ी वित्तीय गड़बड़ी में कई स्तरों पर मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। मामले की जांच में संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है. इससे पहले भी झारखंड के विभिन्न जिलों में ट्रेजरी से अवैध निकासी के कई मामले सामने आ चुके हैं, जिससे सरकारी वित्तीय निगरानी व्यवस्था पर लगातार सवाल उठते रहे हैं.
सरकार ने बोकारो ,हजारीबाग और चाईबासा में फर्जी निकासी से जुड़े केस में एसआईटी बनाकर जांच शुरू की है वही आईएएस अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में अलग से टीम पूरे घोटाले की जांच कर रही है.इस घटना के बाद प्रशासनिक स्तर पर सतर्कता बढ़ा दी गई है, ताकि भविष्य में ऐसी वित्तीय अनियमितताओं को रोका जा सके.


