मौखिक आदेश पर अटकी कार्रवाई से भड़का गुस्सा, JSLPS में BPO पर सवालों का घेरा

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Saraikela : महुआडांड़ प्रखंड में प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। 6 अप्रैल को आयोजित समीक्षा बैठक में पूर्व उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता ने योजनाओं की बेहद धीमी प्रगति और जमीनी स्तर पर कामकाज की खराब स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित BPO (ब्लॉक प्रोग्राम ऑफिसर) पर तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया था। इस निर्णय को उस समय मीडिया चैनलों और स्थानीय समाचार माध्यमों में भी प्रमुखता से प्रकाशित किया गया, जिससे यह साफ संकेत गया था कि प्रशासन अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगा।लेकिन लगभग एक महीने बाद भी जमीनी हकीकत पूरी तरह उलट नजर आ रही है महुआडांड़ JSLPS के वर्तमान BPO ने यह कहकर पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है कि उन्हें सिर्फ मौखिक आदेश मिला था, कोई लिखित निर्देश प्राप्त नहीं हुआ, इसलिए कार्रवाई संभव नहीं हो सकी।ग्रामीणों और स्थानीय लोगों में इस पूरे प्रकरण को लेकर गहरा आक्रोश है। लोगों का आरोप है कि यह मामला केवल तकनीकी देरी का नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, जवाबदेही की कमी और अंदरूनी संरक्षण का उदाहरण है। उनका कहना है कि जब जिले के सर्वोच्च पद पर बैठे अधिकारी के आदेश को ही गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, तो आम जनता की समस्याओं के समाधान की उम्मीद करना बेकार है।स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि आदेश वास्तव में दिया गया था, तो उसे लिखित रूप में जारी क्यों नहीं किया गया? और यदि लिखित आदेश जारी हुआ, तो उसे लागू करने में इतनी देरी क्यों हुई? इन सवालों ने प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यप्रणाली दोनों पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही संबंधित BPO को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने और आदेश के क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने वाले अन्य अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

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