झारखंड विधानसभा में गूंजा रिटायरमेंट उम्र और बैकलॉग नियुक्तियों का मुद्दा, सरकार ने दिया साफ जवाब

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रांची : झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन शनिवार को सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने और राज्य में लंबित बैकलॉग नियुक्तियों का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। सदन में इन दोनों विषयों पर सरकार से स्पष्ट रुख मांगा गया।

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चतरा से विधायक जनार्दन पासवान ने कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य में वर्तमान में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की रिटायरमेंट आयु 60 वर्ष है, जबकि केंद्र सरकार की सेवाओं में डॉक्टरों और शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष है। उन्होंने यह भी बताया कि झारखंड में भी डॉक्टरों और विश्वविद्यालय शिक्षकों को 65 वर्ष में सेवानिवृत्त किया जाता है।

उन्होंने पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष कर दी गई है। राज्य में कर्मियों की कमी को देखते हुए आयु सीमा बढ़ाने पर विचार करने की मांग की गई।

इस पर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने स्पष्ट किया कि हर राज्य अपनी भौगोलिक स्थिति, वित्तीय संसाधनों और प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार निर्णय लेता है। उन्होंने कहा कि फिलहाल झारखंड में सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

मंत्री ने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में शिक्षित बेरोजगार युवा हैं और सरकार व्यवस्थित तरीके से नियुक्तियां कर रही है। यदि रिटायरमेंट आयु बढ़ाई जाती है तो नई भर्तियों के अवसर कम हो सकते हैं। इसलिए सरकार की प्राथमिकता रिक्त पदों पर युवाओं की बहाली है।

खिजरी से विधायक राजेश कच्छप ने अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के बैकलॉग पदों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आरक्षित वर्गों के हजारों पद लंबे समय से खाली हैं और इन्हें भर्ती प्रक्रिया में समुचित रूप से शामिल नहीं किया जाता। उन्होंने समयबद्ध और स्पष्ट नीति के तहत बैकलॉग नियुक्तियां करने की मांग की।

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सरकार की ओर से जवाब में कहा गया कि विभिन्न विभागों में 50 हजार से अधिक बैकलॉग रिक्तियों का दावा सही नहीं है। सरकार ने आश्वस्त किया कि रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जा रहा है।

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