रामकथा ही अमरकथा है, जीवन को गति देने के लिए पुत्र जरूरी : मंदाकिनी मां

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Saraikela : रामकथा ही अमरकथा है. उक्त बातें वाराणसी से पधारी कथा वाचिका मंदाकिनी मां ने कही. वह हरिओम नगर स्थित कलश रूपी शिव काली मंदिर में आयोजित रामकथा में धर्मानुरागी भक्तों से कही. उन्होंने कहा कि जब व्यास जी ने पुत्र प्राप्ति के लिए सौ वर्षों तक कठोर तपस्या किया, जिसके बाद व्यास जी को धृतात्री नामक अप्सरा के सानिध्य से भगवान सुकदेव जैसे पुत्र की प्राप्ति हुई थी. क्योंकि उन्हें भगवान इंद्र ने कहा था कि जीवन को गति देने के लिए पुत्र जरूरी है. लेकिन व्यास जी बगैर स्त्री के पुत्र चाहते थे. बता दें कि इस मंदिर में मंदिर के 15वें स्थापना दिवस पर हर वर्ष 11 दिवसीय रामकथा सह शत चंडी महायज्ञ का आयोजन होता है. इस वर्ष पहली बार यहां महिला कथा वाचक को आमंत्रित किया गया है. कथा सुनने वालों में सैंकड़ों महिला और पुरुष शामिल रहे. यहां आगामी 23 जनवरी तक रामकथा और धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन होगा. इस आयोजन में समाजसेवी एके श्रीवास्तव, आरएन प्रसाद, वीरेंद्र कुमार यादव, केडी सिंह, रविन्द्र नाथ चौबे, हरेन्द्र तिवारी, प्रकाश मेहता, जवाहर लाल सिंह उर्फ मामा जी, रजनीकांत जायसवाल और सूरज भदानी, समिति के अध्यक्ष उपेन्द्र ठाकुर, महामंत्री मनोज तिवारी तथा कैलाश पाठक, एस० वेणुगोपाल, जतन कुमार, प्रमोद सिंह, मनोज आगीवाल, नीतू शर्मा, उमेश कुमार दुबे, अनिल प्रसाद, मीना सिंह, संध्या प्रधान, सत्यम भारद्वाज, मंदिर के पुजारी चंद्रभान पंडित आदि का अहम योगदान है.

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