पूर्वी सिंहभूम: धान उपज और MSP खरीद में बड़ा फासला, सवाल खड़े


झारखंड: पूर्वी सिंहभूम जिले में इस बार धान की उपज और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद के बीच बड़ी गड़बड़ी देखने को मिल रही है। कृषि उत्पादन और खरीद लक्ष्य में भारी अंतर से यह मामला सामने आया है।

जिले को इस बार राज्य में सबसे अधिक छह लाख क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य दिया गया है। वहीं, मौसमी परिस्थितियों के कारण लगभग 95,256 हेक्टेयर में ही धान की खेती हो पाई, जबकि कुल खेती योग्य जमीन एक लाख 10 हजार हेक्टेयर है।
जिला कृषि पदाधिकारी के अनुसार यहां की औसत धान उपज केवल 2,500 किलो प्रति हेक्टेयर है। इसी हिसाब से कुल अनुमानित उत्पादन लगभग 2,38,140 क्विंटल ही है। इस तुलना में तय लक्ष्य तीन गुना ज्यादा प्रतीत होता है, जिससे खरीद और उत्पादन के आंकड़ों में बड़ा अंतर दिखता है।
जानकारों का मानना है कि व्यापारी सीमावर्ती पश्चिम बंगाल और ओडिशा से सस्ता धान खरीदकर यहां के खरीद सेंटरों को बेचते हैं, जिससे वास्तविक उपज और समर्थन मूल्य पर खरीदी के आंकड़ों में असमानता बनी रहती है।
जिले में करीब 22 हजार किसान पंजीकृत हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ लगभग 6,000 किसान ही धान की खेती करते हैं। इसके बावजूद पिछले साल इन किसान समूहों ने लगभग सात लाख क्विंटल से अधिक धान बेचा था, जो औसत हिसाब से लगभग 116 क्विंटल प्रति किसान होता है। यह आंकड़ा कृषि विशेषज्ञों को भी अविश्वसनीय लगता है क्योंकि बड़े किसान संख्या कम है और छोटे किसान मुख्य रूप से अपने घर के लिए धान रखते हैं।
किसानों की पंजीकरण और जमीन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर यह स्पष्ट किया जाना जरूरी बताया जा रहा है कि वास्तविक उत्पादन, पंजीकृत बिक्री और MSP पर खरीदी में यह बड़ा अंतर क्यों है। MSP पर धान की खरीद 15 दिसंबर से शुरू होने वाली है, ऐसे में इस फासले का समाधान भी खरीद प्रक्रिया से पहले खोजना जरूरी माना जा रहा है।



