1908 का सीएनटी एक्ट झारखंड में 117वीं वर्षगांठ मना रहा है

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झारखंड: एक सौ सत्रह वर्ष पहले, 11 नवंबर 1908 को, Chotanagpur Tenancy Act, 1908 (सीएनटी एक्ट) लागू हुआ था, जिसे वर्ष-प्रतिवर्तित रूप से इस वर्ष एक महत्वपूर्ण मील-पत्थर के रूप में देखा जा रहा है।

इस अधिनियम का मूल रूप Bengal Estates Acquisition Act, 1885 के अनुरूप तैयार किया गया था, जिसमें विशेष रूप से अनुसूचित जनजातियों की भूमि-संपदा को सुरक्षित करने के प्रावधान जोड़े गए थे।

कुल 271 धाराओं वाला यह अधिनियम आज तक लगभग 57 बार संशोधित हो चुका है।

आरंभ में इस अधिनियम के लागू होने का उद्देश्य था कि उस समय कृषि-जीविका पर निर्भर लगभग 90 प्रतिशत आबादी की जमीन-सम्बन्धी समस्या को नियंत्रित किया जाए।

लागू होने के तुरंत बाद इस एक्ट के तहत जनजातीय भूमि के हस्तांतरण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था; बावजूद इसके, प्रथम चरण में भूमि-सम्बन्धी विवाद पूरी तरह से समाप्त नहीं हो सके थे।

आगे चलकर, 1938 और 1947 में इस अधिनियम में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए। आज के समय में भी यह जनजातीय क्षेत्र में भूमि-संपदा सुरक्षित रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी ढांचा माना जाता है।

इस वर्ष इस अधिनियम की 117वीं वर्षगांठ मनाते हुए, संबंधित शोध-संस्थान ने ऐतिहासिक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट भी प्रकाशित की है, जिसमें एक्ट की विधि, क्षेत्र, प्रभाव और वर्तमान समस्या-स्थिति का अध्ययन शामिल है।

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