अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ का तीसरा दिन संपन्न


जमशेदपुर:- जमशेदपुर समेत पूरे देश में आज छठ महापर्व का तीसरा दिन संध्या अर्घ्य के साथ श्रद्धा और भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया। सोमवार की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए घाटों पर व्रती महिलाओं और श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ पड़ी। जमशेदपुर के सोनारी, बारीडीह, सीतारामडेरा, कदमा, आदित्यपुर सहित देश के हर राज्य में गंगा तटों, तालाबों और नदी किनारों पर आस्था का सागर उमड़ पड़ा। महिलाओं ने पीले और लाल वस्त्र धारण कर टोकरी में ठेकुआ, कसरी, नारियल, फल और दीपक सजाकर जल में खड़ी होकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया। जैसे ही सूर्य पश्चिम दिशा में ढलने लगा, वैसे ही घाटों पर “छठी मइया की जय” और “सूर्य भगवान की जय” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। लोकगीतों की मधुर धुनें—“कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए…”—हर घाट पर गूंजती रहीं, और श्रद्धा, विश्वास तथा भक्ति का अद्भुत संगम दिखाई दिया। छठ पर्व के तीसरे दिन को संध्या अर्घ्य कहा जाता है, जो व्रती के 36 घंटे के निर्जला उपवास का महत्वपूर्ण चरण होता है। यह व्रत केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि आत्मबल, अनुशासन और मातृत्व की असीम शक्ति का प्रतीक है। छठ पर्व सूर्य उपासना का एकमात्र ऐसा पर्व है जो प्रकृति, पर्यावरण और पारिवारिक एकता का संदेश देता है। सूर्य देव को ऊर्जा और जीवन का स्रोत मानते हुए भक्त यह मान्यता रखते हैं कि उनकी उपासना से रोगों का नाश, मन की शुद्धि और जीवन में समृद्धि आती है। छठी मइया यानी उषा और प्रत्यूषा, जो भोर और संध्या की देवी हैं, जीवन में नई शुरुआत और प्रकाश का प्रतीक मानी जाती हैं। इस पर्व में स्वच्छता, सात्विकता और पवित्रता का विशेष महत्व होता है। व्रती अपने घरों और घाटों की सफाई करते हैं, बिना नमक और बिना लहसुन-प्याज के प्रसाद तैयार करते हैं, जो भक्ति की शुद्धता का प्रतीक है। छठ पर्व का उल्लेख प्राचीन काल से मिलता है। माना जाता है कि महाभारत काल में द्रौपदी ने भी सूर्य देव की उपासना की थी, जिसके फलस्वरूप पांडवों को संकट से मुक्ति मिली। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मुंबई से लेकर नेपाल तक आज हर जगह आस्था की लहर देखने को मिली। जमशेदपुर के घाटों पर भी शाम से ही दीपों की रोशनी और गीतों की गूंज ने माहौल को भक्ति में डुबो दिया। अब भक्तों की निगाहें कल की भोर पर टिकी हैं, जब उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ यह चार दिवसीय महापर्व संपन्न होगा।




