ब्रह्मानंद अस्पताल पर भारी आरोप : बिना ऑपरेशन थमाया सर्जरी का बिल, दवाइयों का ओवरडोज़ और मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़


सरायकेला : जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलने वाला एक बड़ा मामला ब्रह्मानंद नारायणा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, तमोलिया (चांडिल) से सामने आया है। जिला प्रशासन द्वारा गठित जांच टीम की रिपोर्ट ने अस्पताल की मनमानी, लूट और मरीजों की जिंदगी से हो रहे खिलवाड़ को उजागर कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल प्रबंधन द्वारा मरीजों को जानबूझकर जरूरत से कहीं अधिक दवाइयाँ और उपभोग्य सामग्री उपलब्ध कराई गई। इतना ही नहीं, सबसे गंभीर आरोप यह है कि मरीज के शरीर पर कहीं भी ऑपरेशन का निशान नहीं मिला, लेकिन अस्पताल ने सर्जरी का मोटा बिल थमा दिया। यह मामला सिर्फ़ धोखाधड़ी नहीं बल्कि सीधा-सीधा आपराधिक लापरवाही और स्वास्थ्य व्यवस्था के नाम पर लूट है।
जांच दल में शामिल डॉक्टरों ने पाया कि मरीज श्रीमती मुनमुन राय (63 वर्ष) को केवल 45 घंटे के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया था, लेकिन उस दौरान उनके नाम पर 36 इंजेक्शन नॉरएड्रेनालाइन, 12 इंजेक्शन ओंडेस्ट्रोन और 24 इंजेक्शन पैंटोप्राजोल तक चढ़ा दिए गए। इसके अलावा बार-बार महंगे सर्जिकल सामान का उपयोग दिखाया गया जिसमें दर्जनों ग्लव्स, कॉटन रोल, स्वाब गॉज, IV सेट और कैनुला शामिल थे। इसी तरह मरीज के मामले में भी 16 इंजेक्शन ओंडेस्ट्रोन, 16 पैकेट पैरासिटामोल इन्फ्यूजन और 17 इंजेक्शन क्लिंडामाइसिन का उपयोग दिखाकर भारी-भरकम बिल बना दिया गया। जांच टीम ने रिपोर्ट में लिखा है कि इन दवाइयों का उपयोग वास्तविक आवश्यकता से कई गुना अधिक था और यह पूरी तरह से अस्पताल प्रबंधन की मुनाफाखोरी की रणनीति को दर्शाता है।
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि परिजनों को जो बिल थमाया गया उसमें सर्जरी के मद में भी रकम वसूली गई, जबकि मरीज के शरीर पर ऑपरेशन का कोई निशान तक मौजूद नहीं था। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से सर्जरी का सबूत मांगा तो उन्हें गोलमोल जवाब दिया गया। इस खुलासे ने यह साफ कर दिया है कि अस्पताल इलाज के नाम पर धोखाधड़ी कर रहा है और मरीजों की जेब पर डाका डाल रहा है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि ब्रह्मानंद अस्पताल में यही तरीका सभी मरीजों के साथ अपनाया जाता है। यानी हर मरीज को जरूरत से ज्यादा दवाइयाँ दी जाती हैं, बार-बार महंगे उपकरण और उपभोग्य सामग्री का उपयोग दिखाकर बिल बढ़ाया जाता है। जांच समिति ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए इसे मरीजों की जान से खिलवाड़ बताया और कहा कि अस्पताल ने इलाज के नाम पर अनैतिक और गैर-कानूनी तरीके अपनाए हैं।
इस पूरे प्रकरण ने स्थानीय लोगों और मरीज परिजनों में आक्रोश फैला दिया है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन सख्त कदम नहीं उठाएगा तो निजी अस्पताल मरीजों की जिंदगी के साथ इसी तरह खिलवाड़ करते रहेंगे। क्षेत्रीय लोगों ने मांग की है कि अस्पताल प्रबंधन पर आपराधिक मामला दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए और जिन मरीजों से अधिक वसूली की गई है उन्हें पैसा तुरंत वापस दिलाया जाए।
यह मामला स्वास्थ्य विभाग के लिए भी एक बड़ा सबक है कि सिर्फ अस्पताल चलाने के नाम पर निजी संस्थानों को खुली छूट देना मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। ब्रह्मानंद अस्पताल का यह काला सच पूरे सिस्टम के लिए आंख खोलने वाला है।




