20 मई को देशव्यापी आम हड़ताल: श्रम संहिताओं के खिलाफ ट्रेड यूनियनों की ऐतिहासिक एकजुटता…

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लोक आलोक सेंट्रल डेस्क: केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित चार श्रम संहिताओं के खिलाफ मजदूर वर्ग ने निर्णायक संघर्ष का ऐलान किया है। रांची में आयोजित राज्य स्तरीय संयुक्त मजदूर कन्वेंशन में आठ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, स्वतंत्र फेडरेशनों और अन्य यूनियनों ने एकजुट होकर 20 मई 2025 को राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल का ऐलान किया। साथ ही, देशभर में कार्यस्थलों से लेकर सड़कों तक व्यापक अवज्ञा और प्रतिरोध की कार्रवाई की घोषणा की गई।

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सम्मेलन की अध्यक्षता संजीव श्रीवास्तव (इंटक), अशोक यादव (एटक), भवन सिंह (सीआईटीयू), जगन्नाथ उरांव (एआईसीसीटीयू) और राजीव कुमार तिवारी (एआईयूटीयूसी) ने की। वरिष्ठ ट्रेड यूनियन नेता कॉमरेड रामेंद्र कुमार ने सम्मेलन का उद्घाटन किया, जबकि विषय-वस्तु पर बिश्वजीत देब ने विचार रखे।

सम्मेलन में बैंकिंग, कोयला, इस्पात, सीमेंट, बिजली, राज्य सरकार के कर्मचारी, सेल्स प्रमोशन, अनुबंधित, आउटसोर्स और अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों की भारी उपस्थिति रही। इनमें आशा, आंगनवाड़ी, मिड डे मील, गिग वर्कर, घरेलू कामगार और निर्माण श्रमिक प्रमुख रूप से शामिल थे। किसान नेताओं ने भी 20 मई को ग्रामीण भारत बंद का समर्थन किया।

वक्ताओं ने कहा कि चार श्रम संहिताएं लागू करने से श्रमिकों के मौजूदा अधिकार छिन जाएंगे और उन्हें कॉरपोरेट गुलामी की ओर धकेला जाएगा। इन संहिताओं का उद्देश्य श्रमिकों के मौलिक, लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करना है। ट्रेड यूनियनों के नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार श्रमिकों को डराने, ट्रेड यूनियन गतिविधियों को रोकने और झूठे मामलों में फंसा कर दमनकारी नीति अपना रही है।

कन्वेंशन में यह भी कहा गया कि मजदूर आंदोलन के दबाव के चलते सरकार पिछले चार वर्षों से श्रम संहिताओं को लागू नहीं कर सकी है। लेकिन अब तीसरे कार्यकाल में केंद्र सरकार कॉरपोरेट दबाव में इन्हें लागू करने के लिए आतुर है।

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नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि ये संहिताएं लागू की गईं, तो यह मजदूर वर्ग के अधिकारों का हनन होगा और इसके खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी। 20 मई को हड़ताल केवल कानूनों के खिलाफ नहीं, बल्कि मजदूरों की गरिमा, अधिकार और अस्तित्व की रक्षा के लिए होगी।

 

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