दुमका जेल में लिखी गई निखार की मौत की पटकथा! 50 लाख की सुपारी, कुख्यात शूटर की एंट्री और अब ‘मीडिया कनेक्शन’ पर भी सवाल, निखार सबलोक हत्याकांड में पुलिस का बड़ा खुलासा; कार और मोबाइल नंबर बने अहम सुराग, साजिश की परतें खुलते ही बढ़ा जांच का दायरा, सरायकेला में वारदात ने बधाई अपराधियों की मुश्किलें…

जमशेदपुर:- निखार सबलोक हत्याकांड की जांच ने अब ऐसा मोड़ ले लिया है, जहां कहानी सिर्फ गोली चलाने वाले शूटर तक सीमित नहीं दिख रही। पुलिस के अनुसार, हत्या की साजिश दुमका जेल से रची गई, करीब 50 लाख रुपये में सुपारी तय की गई और वारदात को अंजाम देने के लिए नीरज सिंह हत्याकांड से जुड़े शूटर सागर सिंह को लगाया गया। जांच में अशोक सिंह राघव और सिंटू सिंह समेत कुल 6 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।


पुलिस के मुताबिक, दुमका जेल में बंद कुख्यात अपराधी अखिलेश सिंह ने अपने करीबी अशोक सिंह राघव के जरिए निखार की हत्या की योजना तैयार कराई। शुरुआत में एक गिरोह को इसकी जिम्मेदारी दी गई। आरोपियों ने कई बार निखार की गतिविधियों की रेकी की, लेकिन मौका नहीं मिलने के कारण जमशेदपुर में हत्या की योजना सफल नहीं हो सकी। और यही अपराधियों के लिए काल बन गया।
इसके बाद कथित तौर पर हत्या की सुपारी दूसरे नेटवर्क तक पहुंची। पुलिस के अनुसार, सिंटू सिंह ने सागर सिंह से संपर्क किया, जिसके बाद निखार की हत्या की योजना को अंतिम रूप दिया गया। जांच में करीब 50 लाख रुपये की सुपारी तय होने की बात सामने आई है। पुलिस सागर सिंह को इस हत्याकांड का मुख्य शूटर बता रही है।
अपराधियों की एक गलती ने खोल दिया पूरा राज
पूरी साजिश को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल की गई कार पुलिस की जांच में सबसे अहम कड़ी बनकर सामने आई। आरोपियों ने जमशेदपुर की एक सेकेंड हैंड कार एजेंसी से वाहन खरीदा था। पहचान छिपाने के लिए कार किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर खरीदी गई और दस्तावेज के तौर पर आधार कार्ड का इस्तेमाल किया गया। लेकिन कार खरीदते समय दर्ज कराया गया मोबाइल नंबर आरोपी सुनील का अपना था।
यही चूक पुलिस के लिए बड़ा सुराग बन गई। मोबाइल नंबर के आधार पर पुलिस सुनील तक पहुंची। पूछताछ के दौरान उसके संपर्कों की जांच की गई तो मामला अशोक सिंह राघव तक पहुंचा। इसके बाद पुलिस को सिंटू सिंह की भूमिका के बारे में जानकारी मिली। एक मोबाइल नंबर ने उस नेटवर्क का रास्ता खोल दिया, जिसे पहचान छिपाकर चलाने की कोशिश की गई थी।
सरायकेला में वारदात ने बढ़ाई अपराधियों की मुश्किल
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अखिलेश सिंह गिरोह का प्रभाव मुख्य रूप से पूर्वी सिंहभूम क्षेत्र में रहा है। ऐसे में सरायकेला-खरसावां जिले में निखार की हत्या को अंजाम देना गिरोह के लिए उलटा पड़ गया।
सरायकेला एसपी मनोज स्वर्गियारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीम को सक्रिय किया। डीआईजी कोल्हान के आदेश पर जमशेदपुर और सरायकेला पुलिस ने संयुक्त रूप से तकनीकी जांच और पूछताछ के जरिए आरोपियों तक पहुंचने का सिलसिला शुरू किया। जांच में सामने आए सुरागों के आधार पर 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।
अब जांच के घेरे में कथित मीडिया कनेक्शन भी?
निखार हत्याकांड के बीच जमशेदपुर के मीडिया जगत को लेकर भी कुछ गंभीर दावे और चर्चाएं सामने आई हैं। सूत्र बताते है कि अपराध जगत से जुड़े कुछ लोगों ने कथित तौर पर मीडिया संस्थानों और पत्रकारों के जरिए अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की। सोशल मीडिया से लेकर मीडिया संस्थानों तक नेटवर्क खड़ा करने और कथित तौर पर सूचनाएं जुटाने के आरोप भी लगाए गए हैं। सूत्र बताते है कि गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल से कुछ महिला पत्रकारों के साथ के सामान्य से अलग फोटो और वीडियो भी मिले है। हालांकि पुलिस इस बात को आधिकारिक रूप से नहीं बता रही है। पुलिस का कहना है कि कई सफेदपोशों का कनेक्शन पाया गया है और उन सबके चल और अचल संपति की जांच भी कराई जाएगी।
सरायकेला एसपी मनोज स्वर्गियारी के अनुसार, मामले का उद्भेदन पुलिस के लिए चुनौती था। जमशेदपुर और सरायकेला पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में घटना से जुड़े लोगों तक पहुंच बनाई गई है और फरार आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार करने का प्रयास जारी है।
फिलहाल निखार सबलोक हत्याकांड की जांच ने अपराध की एक ऐसी तस्वीर सामने रखी है, जिसमें जेल से की गई साजिश, लाखों की सुपारी, पुराना आपराधिक नेटवर्क, शूटर और तकनीकी सुराग एक-दूसरे से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। अब पुलिस की अगली कार्रवाई तय करेगी कि इस साजिश की आखिरी कड़ी आखिर कहां जाकर जुड़ती है।


