खरना के साथ शुरू हुआ महाव्रत, कल अस्ताचलगामी सूर्य को दिया जायेगा पहला अर्घ


Jamshedpur : चैती छठ महापर्व के दूसरे दिन सोमवार को खरना का अनुष्ठान पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ. व्रत रखने वाले लोगों ने दिन भर कुछ नहीं खाया, फिर शाम को पूजा की और भगवान सूर्य को भोग चढ़ाया. इसके बाद खीर, रोटी और अन्य प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू किया गया. छठ पूजा को लेकर शहर के गली-मोहल्लो में छठी मैया की भक्ति गीत बजने लगी है। लोग छठ की खरीददारी करने के लिए जुटे हुए है। वहीं चैती छठ पूजा को लेकर शहर के छठ घाट अबतक अधूरे है। छठ घाटाें में नगर निगम व जिला प्रशासन की ओर से कोई तैयारी नहीं की गई है। शहर के तालाबों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है।चैती छठ पूजा का तीसरा दिन 24 मार्च को सबसे महत्वपूर्ण संध्या अर्घ्य होता है। इस दिन व्रती शाम के समय किसी पवित्र नदी, तालाब के किनारे सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करती हैं। अर्घ्य में फल, फूल, ठेकुआ समेत कई परंपरिक सामग्रियां शामिल होता है। इस दिन 6:40 में सूर्यास्त होगा।चैती छठ पूजा का अंतिम दिन 25 मार्च को सुबह के अर्घ्य के साथ संपन्न हो जाएगा। इस दिन व्रती उगते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देती हैं। अर्घ्य देने के बाद व्रती प्रसाद बांटते हैं और फिर अपने व्रत का पारण करती हैं। इस दिन सूर्योदय सुबह 5:48 में होगा। इसी के साथ चार दिनों तक चलने वाला आस्था का महापर्व छठ की समाप्ति होती हैं।
छठ महापर्व के दौरान पारंपरिक लोकगीतों से वातावरण भक्तिमय हो गया है. लोग “पहिले पहिल हम कईनी, छठी मईया व्रत तोहार…” और “ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से…” जैसे गीतों के साथ श्रद्धालु छठी मईया और भगवान सूर्य की आराधना में लीन हैं. पूरा वातावरण भक्ति और आस्था से सराबोर हो उठा है.



