स्वास्थ्य मंत्री ने अपनी राय व्यक्त की है, सरकार की ओर से ऐसे किसी आदेश की उन्हें जानकारी नहीं है : जेएमएम प्रवक्ता


Saraikela : झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के उस बयान को लेकर सियासी बहस तेज़ हो गई है, जिसमें उन्होंने बिहार की आयुष डॉक्टर डॉ. नुसरत परवीन को झारखंड सरकार की तरफ से सरकारी नौकरी का बड़ा ऑफर देने की बात कही थी. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि महागठबंधन की हेमंत सोरेन सरकार द्वारा डॉक्टर नुसरत को ₹3 लाख मासिक वेतन, सरकारी आवास (फ्लैट) तथा मनचाही पोस्टिंग के साथ सम्मानजनक नौकरी का प्रस्ताव दिया गया है. उन्होंने इस कदम को महिला सम्मान और पेशेवर गरिमा के लिहाज़ से जरूरी बताया और कहा कि झारखंड सरकार किसी भी बेटी या डॉक्टर के सम्मान से समझौता नहीं करेगी. हालाँकि, इरफान अंसारी के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में विवाद छिड़ गया है. झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) को छोड़कर विपक्षी दलों ने इस बयान को सरकार का आधिकारिक फैसला न बताते हुए इसे मंत्री का निजी यान करार दिया है. झामूमो प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री ने अपनी राय व्यक्त की है, लेकिन सरकार की ओर से ऐसे किसी आदेश की उन्हें जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि एक मंत्री स्तर से ₹3 लाख की नौकरी दी जा सकती है.”
मनोज पांडेय ने विवाद को राजनीतिक चाल बताते हुए कहा कि मंच पर महिलाओं को अपमानित करने की घटनाएँ लगातार हो रही हैं और इस मुद्दे को दबाने के लिए ऐसा बयान दिया गया है. उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि “ऐसी मनोदशा वाले व्यक्ति को भाजपा मुख्यमंत्री क्यों बनाए हुए है?” जैसे तीखे सवाल भी मंच पर खड़े किए जा रहे हैं.
जदयू और भाजपा नेताओं ने भी इस मामले पर हमला करते हुए कहा है कि किसी भी मंत्री के पास नियमों से हटकर नियुक्ति देने का अधिकार नहीं होता और यह बयान “बिना आधार” बताया है. जदयू के सरयू रॉय ने कहा कि नियमों के तहत ही नियुक्ति दी जा सकती है, न कि किसी व्यक्तिगत बयान के आधार पर. यह मामला बिहार में डॉ. नुसरत के साथ हुई हिजाब विवाद के कारण पहले से ही सुर्खियों में है, और अब जहाँ एक ओर सामाजिक और महिला सम्मान के मुद्दे पर राजनीति तेज़ है, वहीं दूसरी ओर यह चर्चा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का बड़ा विषय बन गई है.




