कांटे के मुकाबले में फंसे तेजस्वी यादव, कभी चल रहे आगे तो कभी पीछे


बिहार: 1998 के बाद से राघोपुर सीट पर लगभग राजद का एकछत्र दबदबा रहा है, सिवाय 2010 के विधानसभा चुनाव के, जब पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था. 1995 और 2000 में लालू प्रसाद यादव ने यहां से जीत हासिल की.बिहार विधानसभा चुनावों के लिए मतगणना में बड़ा उलटफेर होते दिख रहा है. लालू यादव की पार्टी आरजेडी उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई. महागठबंधन भी रूझानों में बहुत खराब प्रदर्शन कर रहा है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)- जनता दल यूनाइटेड (जदयू) गठजोड़ राज्य की 243 सीटों में कई स्थानों पर आगे चल रहा है. राघोपुर विधानसभा से राजद के अब सर्वेसर्वा और महागठबंधन से डिप्टी सीएम पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव खुद अपनी ही सीट पर बीजेपी के सतीश यादव से कांटे के मुकाबले में फंस गए हैं.राघोपुर विधानसभा क्षेत्र लंबे समय से लालू परिवार की राजनीतिक विरासत से जुड़ा रहा है. यही वह सीट है, जिसने बिहार की राजनीति को दो मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव औऱ राबड़ी देवी दिए हैं. तेजस्वी भी यहीं से जीतकर उपमुख्यमंत्री बने. राघोपुर, यादव बहुल इलाका रहा है और आज भी इस समुदाय का वोट यहां निर्णायक भूमिका निभाता है.1995 और 2000 में लालू प्रसाद यादव ने यहां से जीत हासिल की. 2000 के उपचुनाव और 2005 में राबड़ी देवी ने यहां से दो बार चुनाव जीता. इसके बाद 2015 और 2020 में तेजस्वी यादव ने लगातार दो बार जीत दर्ज की. राघोपुर विधानसभा क्षेत्र को तीन केंद्रीय मंत्री देने का भी गौरव हासिल है, जिनमें रामविलास पासवान, चिराग पासवान और पशुपति कुमार पारस शामिल हैं, जो हाजीपुर लोकसभा सीट से चुनकर संसद तक पहुंचे.




