श्रेयस तलपड़े और आलोक नाथ को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

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दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अभिनेता श्रेयस तलपड़े और आलोक नाथ को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने कोऑपरेटिव सोसाइटी से जुड़े धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के मामले में जांच पूरी होने तक दोनों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने श्रेयस तलपड़े की याचिका पर सुनवाई करते हुए पहले से मिली गिरफ्तारी से सुरक्षा को जारी रखने का फैसला किया। कोर्ट उन याचिकाओं पर भी सुनवाई कर रहा है, जिनमें दोनों एक्टर्स ने अलग-अलग राज्यों में दर्ज FIR को एक साथ जोड़ने की मांग की है।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और आर महादेवन की कोर्ट के सामने सुनवाई के दौरान श्रेयस तलपदे के वकील ने उनका पक्ष रखा। वकील ने कहा कि एक्टर को कंपनी के सालाना इवेंट में गेस्ट सेलिब्रिटी के तौर पर बुलाया गया था। वकील ने यह भी बताया कि श्रेयस तलपदे ने इस मामले में कभी कोई पैसा नहीं कमाया।’
वहीं आलोक नाथ के वकील ने भी कहा कि एक्टर ने मार्केटिंग कंपनी के किसी फंक्शन में हिस्सा नहीं लिया और उनकी फोटो 10 साल पहले इस्तेमाल की गई थी। आलोक नाथ के वकील ने कहा, ‘अगर कोई टॉप एक्टर या क्रिकेटर किसी कॉर्पोरेट कंपनी के लिए विज्ञापन कर रहा है या ब्रांड एंबेसडर के तौर पर दिख रहा है और वह कंपनी लिक्विडेशन में चली जाती है या कंपनी के खिलाफ आपराधिक मामले हैं, तो क्या यह क्रिकेटर या एक्टर के खिलाफ भी जाएगा? वकील की इस दलील पर कोर्ट ने विचार किया.आलोक नाथ और श्रेयस तलपदे के मामले की सुनवाई पर कोर्ट ने कहा, ‘हम इस याचिका (तलपदे द्वारा दायर) का निपटारा करते हैं। जब तक मामले की जांच पूरी नहीं होती, तब तक याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी नहीं होगी।’ सुप्रीम कोर्ट अलग-अलग राज्यों में दर्ज एफआईआर को एक साथ जोड़कर श्रेयस तलपदे और आलोक नाथ द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था।
श्रेयस तलपदे और नाथ के अलावा तेरह लोगों पर 37 वर्षीय सोनीपत निवासी विपुल अंतिल ने एक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत करने वाले ने आरोप लगाया कि दोनों एक्टर्स ने ‘ह्यूमन वेलफेयर क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड’ का बतौर ब्रांड एंबेसडर प्रमोशन किया है। बाद में इसी कंपनी का नाम एक मार्केटिंग स्कैम में सामने आया। पुलिस ने भी आलोक नाथ और श्रेयस तलपदे के बारे में कहा, ‘वे कंपनी के ब्रांड एंबेसडर थे और इनकी वजह से पीड़ित लोग निवेश करने के लिए आकर्षित हुए। इसलिए शिकायत में उनका नाम था। एक एफआईआर दर्ज की गई है। अब जांच की जाएगी कि उनकी क्या भूमिका थी। इस मामले में एफआईआर 22 जनवरी को कई धाराओं में दर्ज की गई थी। भारतीय न्याय संहिता की यह धाराएं आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी से जुड़ी हैं।

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