एम जी एम के अधीक्षक डॉ अरुण कुमार के निलंबन पर सरयु राय ने बन्ना गुप्ता को घेरा, निलंबन को बताया राजनीतिक अत्याचार

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जमशेदपुर :-  एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ अरुण कुमार को निलंबित करने के मामले में पूर्वी जमशेदपुर के विधायक सरयू राय ने कहा है कि एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक का निलंबन और मंत्री के कार्यालय से निलंबन की प्रेस विज्ञप्ति जारी होना एक भलेमानस वरीय चिकित्सक पर प्रशासनिक एवं राजनीतिक अत्याचार है. यह स्वास्थ्य मंत्री का द्वेषपूर्ण मनमाना निर्णय है. एमजीएम की स्थिति में सुधार से इसका कोई लेना देना नहीं है. यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का उल्लंघन है और नैसर्गिक न्याय के विरूद्ध है. बिना आरोप बताये, बिना स्पष्टीकरण पूछे और स्पष्टीकरण के जवाब का इंतज़ार किए बिना एक वरीय चिकित्सक और नेक दिल इंसान पर निलंबन की गाज गिरा देना असंतुलित मानसिकता और विकृत प्रशासनिक सोच का द्योतक है.

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स्वास्थ्य मंत्री को बताना चाहिए कि एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ॰ अरुण कुमार ने कौन सी ऐसी गलती किया है, जो 5 दिन बाद अवकाश ग्रहण कर रहे वरीय चिकित्सक को निलंबन की सजा देने लायक़ है. 5 दिन के भीतर मंत्री जी ऐसा क्या करने वाले थे जिसमें डॉ॰ कुमार बाधक बन रहे थे.
निम्नांकित बिन्दु इस संदर्भ में ध्यान देने योग्य है:-

1. पहले तो स्वास्थ्य मंत्री को डॉ॰ अरुण कुमार इतना प्रिय लगे कि उनके पास प्राध्यापक पद की योग्यता नहीं होने पर भी मंत्री जी ने उन्हें एमजीएम अस्पताल का अधीक्षक बना दिया. ज्ञातव्य है कि ऐसे अस्पताल का अधीक्षक होने के लिए चिकित्सक को प्राध्यापक होना चाहिए.
2. डॉ॰ अरुण कुमार ने 31 जनवरी 2022 को ही अवकाश ग्रहण कर लिया था. वे सेवा में बने रहने के इच्छुक नहीं थे. पर स्वास्थ्य मंत्री ने इन्हें योग्य पाकर 6 माह की अवधि विस्तार दे दिया.
3. इस बीच ऐसा क्या हुआ कि जब उनका अवधि विस्तार आगामी 31 जुलाई को समाप्त हो रहा था तो स्वास्थ्य मंत्री ने उन्हें निलंबित होने की प्रेस विज्ञप्ति आनन फ़ानन में अपने कार्यालय से जारी कर दिया.
4. सामान्य प्रक्रिया के अनुसार मंत्री जी ने विधिवत आदेश पर विभागीय अधिसूचना निर्गत होने का इंतज़ार नहीं किया. मंत्री जी की कौन सी ऐसी इच्छा थी जिसे डॉ॰ अरुण कुमार ने नहीं पूरा किया. फलतः मंत्री जी ने 5 दिन तक इंतज़ार नहीं किया और उन्हें शालीनता से अवकाश ग्रहण नहीं करने दिया.
5. ऐसा कौन काम स्वास्थ्य मंत्री करना चाहते थे जिसके लिए वे 5 दिन तक इंतज़ार नहीं कर सकते थे और डॉ॰ अरुण कुमार उनकी मंशा पूरा होने की राह में बाधा बन रहे थे.
6. शालीन निर्णय का तक़ाज़ा था कि मंत्री जी उन्हें अवकाश ग्रहण करने के 5 दिन पहले रिटायर करा देते. इस तरह निलंबित कर अपमानित नहीं करते.
डॉ॰ अरुण कुमार का अकारण निलंबन एक असामान्य घटना है. स्वास्थ्य विभाग में हो रही अनियमितता की पोल खोलने वाली है.

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