पर्व-त्योहार के बीच खाद्य दुकानों में नियमों की अनदेखी, प्रतिष्ठित ‘छप्पन भोग’ भी सवालों के घेरे में, विभाग मौन…



जमशेदपुर :- पर्व-त्योहार आते ही मिठाई और खाद्य पदार्थों की दुकानों में ग्राहकों की भीड़ बढ़ जाती है। दुकानदारों के लिए यह कमाई का सीजन है, लेकिन सवाल यह है कि क्या इस सीजन में ग्राहक की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है? लोक आलोक की पड़ताल में यह सामने आया कि शहर की कई दुकानों में खाद्य उत्पादों की लेबलिंग को लेकर ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।

दुकानदारों को MRP लिखना खूब याद रहता है, ताकि ग्राहक को कीमत पता चल जाए, लेकिन उसी पैकेज पर ‘Use Before’ के सामने तारीख या महीना दर्ज करना जरूरी क्यों नहीं समझा जा रहा? ग्राहक पैसे देकर सामान तो खरीद ले, लेकिन वह यह कैसे जाने कि संबंधित खाद्य उत्पाद इस्तेमाल करने की निर्धारित अवधि के भीतर है या नहीं? या फिर प्रोडक्ट तैयार कब किया गया है?
शहर के चर्चित और प्रतिष्ठित प्रतिष्ठानों में शामिल छप्पन भोग के खाद्य उत्पादों को लेकर भी इसी तरह के सवाल सामने आए हैं। यदि किसी उत्पाद पर MRP स्पष्ट है, लेकिन Use Before की जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है, तो सवाल उठना लाजिमी है कि उपभोक्ता को कीमत बताने की इतनी चिंता और उत्पाद की उपयोग अवधि बताने की इतनी कम चिंता क्यों है?
हालांकि यह समस्या केवल एक प्रतिष्ठान तक सीमित नहीं है। जमशेदपुर की कई अन्य दुकानों में भी खाद्य उत्पादों की लेबलिंग और जरूरी जानकारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यानी मामला एक दुकान का नहीं, बल्कि बाजार में नियमों की निगरानी की पूरी व्यवस्था का सवाल बनता जा रहा है।
पड़ताल में आई रिपोर्ट के मुताबिक लापरवाही खाद्य सुरक्षा विभाग की है। आखिर विभाग करता क्या है? क्या अधिकारियों की नजर सिर्फ कागजी रिपोर्ट और औपचारिक निरीक्षण तक सीमित है? जब बाजार में खाद्य उत्पाद खुलेआम बिक रहे हैं और लेबलिंग को लेकर सवाल सामने आ रहे हैं, तो विभाग की ओर से जांच और कार्रवाई नजर क्यों नहीं आती?
क्या विभाग भी त्योहार के सीजन में ‘Use Before’ की तरह अपनी जिम्मेदारी की तारीख भूल गया है?
अगर नियम हैं तो उनका पालन कराने की जिम्मेदारी भी किसी की होगी। फिर सवाल यह है कि नियम तोड़ने या उनकी अनदेखी करने की शिकायतों पर कितनी जांच हुई और कितनी कार्रवाई हुई? क्या विभाग ने शहर के बड़े मिठाई प्रतिष्ठानों से लेकर छोटी दुकानों तक एक समान जांच अभियान चलाया है?
त्योहार के दौरान ग्राहक मिठाई और खाद्य सामग्री सिर्फ स्वाद के लिए नहीं बल्कि भरोसे के साथ खरीदता है । ऐसे में कीमत लिखकर ग्राहक से पैसा लेना और उत्पाद की उपयोग अवधि की स्पष्ट जानकारी नहीं देना गंभीर मामला है।
अब देखना यह है कि खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी कुर्सी से उठकर बाजार में उतर कर दुकानों और पैकेज्ड खाद्य उत्पादों की जांच करते है या फिर नियमों को ताक पर रखकर ग्राहकों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करते है।


