RTI पर सन्नाटा: कोल्हान से पूरे झारखंड तक संगीन मामलों में जवाब गायब, कोल्हान के तीनों जिलों में हालात बदतर, प्रथम अपील के बाद भी नहीं मिल रही जानकारी; जवाबदेही से बचता प्रशासन

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जमशेदपुर/संवाददाता:- कोल्हान प्रमंडल के तीनों जिलों समेत पूरे झारखंड में सूचना के अधिकार को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। संगीन मामलों से जुड़ी RTI आवेदन न केवल लंबित पड़ी हैं, बल्कि प्रथम अपील के बाद भी संबंधित विभागों की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा है। यह स्थिति सीधे तौर पर सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक, कोल्हान के पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिलों में कई महत्वपूर्ण मामलों से जुड़ी RTI महीनों से लंबित हैं। इनमें सरकारी योजनाओं में अनियमितता, खर्च का विवरण और प्रशासनिक फैसलों से जुड़े सवाल शामिल हैं। बावजूद इसके, संबंधित विभागों द्वारा या तो जानबूझकर देरी की जा रही है या फिर जवाब देने से पूरी तरह बचा जा रहा है।

आवेदकों का आरोप है कि अधिकारी सूचना देने के बजाय प्रक्रिया को उलझाने में लगे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि प्रथम अपील दाखिल करने के बाद भी न तो सुनवाई हो रही है और न ही कोई ठोस कार्रवाई की जा रही है। इससे यह साफ होता है कि विभागीय स्तर पर जवाबदेही की भारी कमी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रथम अपील के बाद भी जवाब न मिलना कानून का सीधा उल्लंघन है और इसके लिए संबंधित अधिकारी पर आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है। ऐसे मामलों में आवेदक राज्य सूचना आयोग या केंद्रीय सूचना आयोग में दूसरी अपील कर सकते हैं।

पूरे राज्य में इस तरह की स्थिति ने आम नागरिकों के बीच असंतोष को जन्म दिया है। लोगों का कहना है कि जब पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाला कानून ही प्रभावहीन हो जाए, तो शासन-प्रशासन की विश्वसनीयता पर सवाल उठना लाजमी है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार और प्रशासन इस गंभीर मुद्दे को संज्ञान में लेकर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करेगा, या फिर RTI जैसे मजबूत कानून को यूं ही नजरअंदाज किया जाता रहेगा। फिलहाल, झारखंड में RTI व्यवस्था पर उठे इस सवाल ने पूरे सिस्टम की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

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