पद्यश्री प्रख्यात साहित्यकार प्रो.रामदरश मिश्र का निधन,इनकी रचनाओं में सजता था पूर्वांचल


गोरखपुर: प्रख्यात साहित्यकार आचार्य रामदरश मिश्र के निधन से हिंदी साहित्य जगत में शोक की लहर है।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे हिंदी साहित्य के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति बताया है।सीएमओ सूत्र के अनुसार मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंदी साहित्य के क्षेत्र में प्रोफेसर रामदरश मिश्र का निधन अपूरणीय क्षति है। श्रीराम पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिजनों को दुःख सहने की शक्ति दें।वह अपनी कृतियों के माध्यम से सदैव लोगों के मन में जीवित रहेंगे.गोरखपुर जिले के कछार अंचल के डुमरी गांव में जन्मे मिश्र ने अपने दीर्घ साहित्यिक जीवन में 150 से अधिक पुस्तकें लिखीं। उनकी रचनाओं में ग्रामीण और शहरी जीवन का गहन चित्रण, आम आदमी का संघर्ष, संवेदना और यथार्थ की सजीव अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। उनकी पंक्तियां, ‘न हंसकर, न रोकर किसी में उड़ेला, पिया खुद ही अपना जहर धीरे-धीरे’ आज भी पाठकों के दिलों में गूंजती हैं।आचार्य मिश्र ने कविता, कहानी, उपन्यास, आलोचना, निबंध, आत्मकथा, संस्मरण और यात्रा-वृत्तांत जैसी सभी विधाओं में लेखन किया। उनके यात्रा अनुभव ‘तना हुआ इंद्रधनुष’, ‘भोर का सपना’, ‘घर से घर तक’, ‘देश-यात्रा’ और ‘पड़ोस की खुशबू’ जैसी कृतियों में जीवंत रूप से व्यक्त हुए हैं। उन्होंने ‘स्मृतियों के छंद’, ‘अपने-अपने रास्ते’ और ‘एक दुनिया अपनी’ जैसी संस्मरण पुस्तकों में साहित्यिक मित्रों और प्रेरणास्रोतों को सादगी और आत्मीयता के साथ याद किया।उनकी रचनाओं को पूर्वांचल के लोकजीवन, इतिहास, भूगोल और भोजपुरी क्षेत्र का उल्लेखनीय चित्रण मिलता है। उन्होंने अपने संपूर्ण जीवन का सदुपयोग साहित्य के क्षेत्र में ही किया। उनके निधन से संपूर्ण साहित्य जगत की क्षति तो हुई ही है, पूर्वांचल खासतौर से गोरखपुर का विशेष नुकसान हुआ है। साहित्य जगत में उनकी भरपाई आसान नहीं होगी। शोक व्यक्त करने वालों में प्रो. अनंत मिश्र, प्रो. चित्तरंजन मिश्र, प्रो. अनिल राय, प्रो. राजेश मल्ल प्रमुख रहे।




