इंटर शिक्षकों की सेवा समाप्ति पर उठे सवाल, परीक्षा ड्यूटी के आदेश से बढ़ा विवाद



जमशेदपुर : जमशेदपुर वर्कर्स कॉलेज के इंटरमीडिएट अनुभाग को लेकर जारी तीन अलग-अलग पत्रों के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। राजभवन के पत्र संख्या 1495 (30 मई 2025) में नई शिक्षा नीति-2020 के तहत डिग्री कॉलेजों में इंटरमीडिएट में नामांकन बंद करने और विश्वविद्यालयों से प्रतिवेदन मांगे जाने का उल्लेख है। इसी पत्र का हवाला देते हुए कॉलेज प्रशासन ने 30 मार्च 2026 को शिक्षकों तथा 30 मई 2026 को इंटरमीडिएट अनुभाग के कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने की सूचना जारी की। वहीं 3 अगस्त 2026 को कॉलेज प्रशासन ने झारखंड अधिविद्य परिषद (जैक) की इंटरमीडिएट प्रायोगिक एवं आंतरिक परीक्षा-2026 के सफल संचालन के लिए उन्हीं इंटरमीडिएट शिक्षकों से सहयोग करने संबंधी आधिकारिक सूचना जारी कर दी।इस घटनाक्रम के बाद शिक्षकों और कर्मचारियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं, तो परीक्षा संचालन के लिए उन्हीं से सहयोग क्यों मांगा जा रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि राजभवन के पत्र में कहीं भी शिक्षकों या कर्मचारियों को हटाने का निर्देश नहीं था, बल्कि केवल नामांकन बंद करने और आवश्यक प्रतिवेदन देने की बात कही गई थी। उनका कहना है कि कॉलेज प्रशासन ने उसी पत्र के आधार पर मनमाने ढंग से सेवा समाप्ति का निर्णय लिया। कर्मचारियों ने सरकार, राजभवन, विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित विभाग से निष्पक्ष जांच तथा सेवा से हटाए गए शिक्षकों और कर्मचारियों की बहाली की मांग की है। साथ ही बताया कि इस मामले में 3 जून 2026 को जमशेदपुर के श्रम विभाग के उपायुक्त से शिकायत की जा चुकी है, जिसकी प्रक्रिया जारी है। जरूरत पड़ने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की भी बात कही गई है।




