“महिला सशक्तिकरण” के नाम पर ADB से कर्ज मांगेगा पाकिस्तान, फिर सामने आया कटोरा संस्कृति का असली चेहरा!

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लोक आलोक न्यूज डेस्क/ देश विदेश :- पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी कर्जखोरी की आदत को लेकर सुर्खियों में है। इस बार मामला थोड़ा नया है, पर इरादा वही पुराना – भीख मांगना। इस्लामाबाद ने एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से करीब 30 करोड़ डॉलर का कर्ज मांगा है और इसकी आड़ में तर्क दिया है कि ये रकम देश में महिला सशक्तिकरण, महिला उद्यमिता, शिक्षा और वित्तीय समावेशन पर खर्च की जाएगी।

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कागज़ों पर ये प्रस्ताव सुनने में जितना सुंदर लगता है, हकीकत उतनी ही उलट है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले ही चरमराई हुई है। IMF से लेकर चीन तक, हर जगह से कर्ज लेकर कर्ज चुकाने की एक अंतहीन श्रृंखला बन चुकी है। अब महिला सशक्तिकरण जैसे संवेदनशील विषय को कर्ज हथियाने के लिए इस्तेमाल करना कहीं न कहीं पाकिस्तान की मंशा पर सवाल खड़े करता है।

क्या वाकई पाकिस्तान में महिलाओं की स्थिति सुधारने की योजना है, या फिर ये भी एक और “डिप्लोमैटिक मास्क” है ताकि दुनिया की नजरों में संवेदनशीलता दिखाई जा सके और पैसा निकलवाया जा सके? आंकड़े बताते हैं कि वहां महिलाओं को अभी भी शिक्षा, रोजगार, और सुरक्षा के बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

ADB इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, लेकिन सवाल उठता है कि क्या हर बार नए नाम पर पुरानी नीयत को छिपाया जा सकता है? क्या हर कर्ज को “विकास” और “सशक्तिकरण” के नाम पर जायज़ ठहराया जा सकता है?

असल में, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अब नीतियों पर नहीं, कर्जदारों की कृपा पर टिकी हुई है। खुद का सिस्टम ढीला, नीयत संदिग्ध और सोच पुरानी – यही पाकिस्तान की आज की असली तस्वीर है।

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