दो साल में सिर्फ 4 जिलों ने भेजी जमीन की रिपोर्ट, ₹19.73 करोड़ का बजट भी लौटा; चालक प्रशिक्षण केंद्र योजना अटकी






रांची : झारखंड में व्यावसायिक वाहन चालकों को आधुनिक प्रशिक्षण देने और सड़क सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए प्रस्तावित चालक प्रशिक्षण केंद्रों की योजना वर्षों बाद भी जमीन पर नहीं उतर सकी है। लेखापरीक्षा में सामने आया है कि भूमि उपलब्धता से जुड़ी जानकारी समय पर नहीं मिलने और विभागीय स्तर पर बार-बार प्रक्रिया बदलने के कारण परियोजना में लंबा विलंब हुआ। फरवरी 2022 में जिलों से जमीन की रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन जुलाई-अगस्त 2024 तक केवल चार जिलों से ही आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई गई। इस बीच वित्तीय वर्ष 2022-23 में केंद्रों की स्थापना के लिए रखे गए 19.73 करोड़ रुपये भी खर्च नहीं हो सके और राशि वापस करनी पड़ी।


राज्य में प्रत्येक जिले में व्यावसायिक मोटर वाहन चालक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने का निर्णय मार्च 2017 में ही लिया गया था। फरवरी 2022 में 10 जिलों के उपायुक्तों को स्वचालित परीक्षण पथ के साथ सरकारी चालक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने के लिए जमीन की उपलब्धता बताने को कहा गया। इसके साथ भवन निर्माण विभाग और जेएसबीसीसीएल को मॉडल डीपीआर तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। जुलाई 2022 में डीपीआर तैयार करने का निर्देश मिला, लेकिन वित्तीय वर्ष समाप्त होने तक निर्माण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी और बजट का उपयोग नहीं किया जा सका।
लेखापरीक्षा में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि विभाग के पास 21 जिलों में पहले से दो से 13 एकड़ तक जमीन चिह्नित होने की जानकारी थी, इसके बावजूद मान्यता प्राप्त चालक प्रशिक्षण केंद्रों के लिए नई जमीन खोजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इससे भूमि चयन की प्रक्रिया फिर से शुरू हुई और योजना में अतिरिक्त देरी हुई। दो वर्ष बाद भी सिर्फ चार जिलों से जमीन की जानकारी मिलने के कारण तीन वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद राज्य में प्रस्तावित मान्यता प्राप्त चालक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित नहीं हो सके।
अगस्त 2024 में जेएसबीसीसीएल ने प्रत्येक मान्यता प्राप्त चालक प्रशिक्षण केंद्र के निर्माण के लिए करीब 4.93 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाला मॉडल डीपीआर प्रस्तुत किया। इसके बाद प्रशासनिक स्वीकृति की दिशा में आगे बढ़ने के बजाय नवंबर 2024 में एजेंसी को स्वचालित परीक्षण पथ, परिवहन भवन सहित मान्यता प्राप्त चालक प्रशिक्षण केंद्र और जिला चालक प्रशिक्षण केंद्र के लिए तीन अलग-अलग डीपीआर बनाने को कहा गया। इससे योजना की प्रक्रिया एक बार फिर लंबी हो गई।
योजना को लेकर विभागीय जिम्मेदारी भी समय-समय पर बदली गई। मार्च 2017 के निर्णय के अनुसार केंद्रों का निर्माण उच्च, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग की निगरानी में किया जाना था, लेकिन नवंबर 2018 में परिवहन विभाग ने निर्माण अपने पर्यवेक्षण में कराने का फैसला किया। जून 2025 में विभाग ने बताया कि जेएसबीसीसीएल ने मास्टर प्लान, ड्राइंग और विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों के डीपीआर तैयार करने के लिए मई 2025 में मेसर्स एसआईएसओ आर्किटेक्ट को अधिकृत किया है। इसके बावजूद पहले से चिह्नित जमीन का उपयोग क्यों नहीं किया गया, इसे लेकर लेखापरीक्षा में सवाल उठे हैं।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अगस्त 2021 में चालक प्रशिक्षण और ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया को मानकीकृत करने के उद्देश्य से देशभर में तीन स्तरों पर प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने के मानक तय किए थे। इसके तहत चालक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान के लिए प्रत्येक पांच करोड़ की आबादी पर एक केंद्र और 10 से 15 एकड़ जमीन, क्षेत्रीय चालक प्रशिक्षण केंद्र के लिए प्रत्येक 2.5 करोड़ की आबादी पर एक केंद्र तथा प्रत्येक जिले में जिला चालक प्रशिक्षण केंद्र के लिए करीब दो एकड़ भूमि का प्रावधान किया गया था।
झारखंड में इन केंद्रों की स्थापना में देरी का सीधा असर व्यावसायिक वाहन चालकों को व्यवस्थित प्रशिक्षण देने और आधुनिक ड्राइविंग टेस्ट व्यवस्था विकसित करने की योजना पर पड़ा है। लेखापरीक्षा के निष्कर्ष यह संकेत देते हैं कि जमीन उपलब्ध कराने, डीपीआर तैयार करने और प्रशासनिक निर्णयों में बेहतर समन्वय होता तो यह आधारभूत ढांचा काफी पहले विकसित किया जा सकता था।


