एक हफ्ते से मीडिया में गूंज रहा नैना का दर्द, फिर भी नहीं पहुंचा पानी”: ग्रामीणों में आक्रोश, कुआं धंसने के 8 दिन बाद भी टैंकर न बोरिंग, महिलाएं बोलीं- “अब बयान नहीं, पानी चाहिए “_ करवाई जारी है_ पीएचडी विभाग



महुआडांड़ (लातेहार): नेतरहाट की तलहटी में बसे नैना गांव के ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे रहा है। 18 मई को गांव का एकमात्र सरकारी कुआं धंसने के बाद से 300 की आबादी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले एक सप्ताह से उनकी पीड़ा लगातार मीडिया की सुर्खियों में है.

“खबर रोज छप रही, जमीन पर काम शून्य”
गांव के उमेश महतो ने नाराजगी जताते हुए कहा, “पिछले 7 दिनों से अखबार, चैनल, पोर्टल सब जगह नैना गांव का जल संकट दिखाया जा रहा है। अधिकारी जांच और टीम भेजने की बात भी कर रहे हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि आज 8वें दिन भी गांव में न पानी का टैंकर पहुंचा और न ही बोरिंग का काम शुरू हुआ।”
भीषण गर्मी में नदी ही सहारा, बीमार पड़ रहे बच्चे-बुजुर्ग
कुआं ध्वस्त होने के बाद ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए 2 किलोमीटर दूर नदी पर निर्भर होना पड़ रहा है। गांव की शकुंतला देवी ने बताया, “सुबह 4 बजे उठकर नदी जाते हैं। छोटे-छोटे बच्चों को साथ ले जाना पड़ता है।मनीता देवी ने कहा, “मीडिया वाले आते हैं, हमारी बात सुनते हैं, खबर चलाते हैं। लगता है अब तो कुछ होगा। लेकिन फिर सब शांत हो जाता है। क्या गरीब-आदिवासियों की आवाज सिर्फ खबर बनकर रह जाएगी”
ग्रामीणों का सवाल: आखिर देरी क्यों?
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब मामला मीडिया में प्रमुखता से उठ रहा है और विभाग को पूरी जानकारी है, तो तत्काल राहत के लिए टैंकर भेजने में देरी क्यों हो रही है। “एकमात्र जलस्रोत था वही धंस गया।
करवाई जारी है _ पीएचडी विभाग
इस संबंध में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग लातेहार के कार्यपालक अभियंता दीपक कुमार महतो ने कहा, “मामला संज्ञान में है। कनीय अभियंता को स्थल निरीक्षण के लिए भेजा गया है।ग्रामीणों को राहत जरूर मिलेगी।”


