निकाय चुनाव 2026 : निर्विरोध जीत के पीछे कहीं न कहीं राजनीतिक समझौते, कमजोर विपक्ष और स्थानीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा की कमी

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Saraikela :  23 फरवरी को झारखंड में होने वाले शहरी स्थानीय निकाय चुनाव से पहले ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया का एक दिलचस्प और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है. राज्य के विभिन्न नगर निकायों के 41 वार्डों में प्रत्याशियों के निर्विरोध चुने जाने से मतदान से पहले ही विजेता का फैसला हो गया है. जबकि 3 वार्ड ऐसे भी हैं जहां एक भी प्रत्याशी ने नामांकन नहीं किया. बता दें कि राज्य में 48 शहरी स्थानीय निकायों के लिए चुनाव प्रक्रिया जारी है. इसके तहत 23 फरवरी को मतदान कराया जाएगा. जबकि 27 फरवरी को मतगणना होगी. इन चुनावों में 9 नगर निगम, 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायतों में महापौर/अध्यक्ष के 48 पदों और 1,087 वार्ड पार्षद पदों के लिए चुनाव होना है. निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, कई वार्डों में नामांकन की अंतिम तिथि तक केवल एक-एक उम्मीदवार ने ही पर्चा भरा. जिसके चलते उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया. वहीं, 3 वार्डों में किसी भी प्रत्याशी के सामने न आने से अब वहां विशेष प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिसमें पुनः चुनाव कार्यक्रम या नामांकन की स्थिति पर निर्णय लिया जाएगा. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निर्विरोध जीत के पीछे कहीं न कहीं राजनीतिक समझौते, कमजोर विपक्ष और स्थानीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा की कमी जैसे कारण हो सकते हैं. हालांकि, बड़ी संख्या में वार्डों में पहले से ही नतीजे तय हो जाना चुनावी उत्साह पर भी सवाल खड़े कर रहा है.
फिलहाल, बाकी वार्डों में चुनावी सरगर्मी तेज है और प्रत्याशी मतदाताओं को लुभाने में जुटे हैं. 23 फरवरी को होने वाला मतदान यह तय करेगा कि शहरी सरकार की बागडोर किन हाथों में जाएगी. यह चुनाव गैर दलगत है लेकिन इसमें भी राजनीतिक पार्टियों द्वारा प्रत्याशियों को हाई जैक कर लिया गया है और पक्ष हो या विपक्ष दोनों ओर से मतदाताओं को यह कन्विन्स किया जा रहा है फलां प्रत्याशी मेरे दल का हॉप उन्हें वोट करेंगे. जो कि सरकार कि गैर दलगत चुनाव करने की मंशा पर पानी फेर रहा है.

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