आदित्यपुर इंडस्ट्रियल एरिया का बड़ा खुलासा: सूत्रों का दावा—कई कंपनियों में मजदूरों के अधिकारों का बेशर्म शोषण, अंदर की हालत बेहद भयावह, मानवाधिकार की खुलेआम उड़ रही धज्जियां…


जमशेदपुर/आदित्यपुर:– आदित्यपुर इंडस्ट्रियल एरिया एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र की कई कंपनियों में मजदूरों और कर्मचारियों के साथ जो व्यवहार हो रहा है, उसने पूरे प्रशासनिक तंत्र की पोल खोलकर रख दी है। अंदरूनी लोगों का कहना है कि हालात इतने खराब हैं कि कई फैक्ट्रियों में काम करना खुद को खतरे में डालने जैसा है।

कर्मचारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि 8 घंटे की जगह 12–14 घंटे तक काम कराया जाता है, वह भी बिना ओवरटाइम का भुगतान किए। मजदूरों का साफ आरोप है कि न सुरक्षा उपकरण दिए जाते हैं, न पीने के पानी व शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएँ ठीक हैं। PF–ESI जैसी अनिवार्य सुविधाएँ भी कागज़ों में दर्ज हैं, जमीन पर कुछ नहीं। यहां तक कि बेसिक वेतन भी नहीं मिल पाता है। कई कंपनियां तो वेंडर के नाम पर खेल जाती है । हालांकि वेंडर के साथ भी अधिकारियों की सेटिंग रहती है।
सूत्र बताते हैं कि कुछ कंपनियाँ रात की शिफ्ट में भी अनियमित तरीके से उत्पादन करवाती हैं और जब किसी अधिकारी के निरीक्षण की सूचना मिलती है, तो उसी दिन “सब ठीक” दिखाने का खेल शुरू हो जाता है। एक कर्मचारी ने कहा—“साहब, अंदर की हालत कोई देखे तो समझे कि मजदूर इंसान हैं या मशीन।”
दूसरे कर्मचारी ने बताया—“फैक्ट्री के अंदर हादसे होते हैं, लोग घायल होते हैं, लेकिन कई बार कंपनी मामले को दबा देती है। इलाज तक का खर्च बड़ी मुश्किल से दिया जाता है।” कई यूनिटों में सुरक्षा मानकों की धज्जियां इस हद तक उड़ाई जाती हैं कि मजदूर रोज़ जोखिम उठाकर काम करते हैं।
अब लेबर विभाग पर भी अंगुलियां उठ रही हैं। कर्मचारियों का कहना है कि ज्यादातर निरीक्षण पहले से सेट होते हैं, और बड़ी कंपनियाँ आसानी से बच निकलती हैं। सूत्रों के मुताबिक, कई फैक्ट्रियाँ सिर्फ फाइलों में नियमों का पालन दिखाती हैं, जबकि असलियत बिल्कुल उलट है।
मजदूरों का कहना है कि अगर जल्द सख्ती नहीं हुई, तो यह क्षेत्र रोजगार का नहीं, बल्कि शोषण का प्रतीक बन जाएगा।
अब सवाल यह है कि प्रशासन इन खुलासों पर कितनी गंभीरता दिखाता है या फिर आदित्यपुर की यह सच्चाई भी अंदर ही अंदर दबा दी जाएगी।



