धोनी के मानहानि केस में मद्रास हाईकोर्ट ने शुरू की सुनवाई, 100 करोड़ रुपये का किया दावा

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चेन्नई — आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में नाम घसीटे जाने पर पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के 10 साल पुराने मानहानि केस में अब तेजी आ गई है। मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई शुरू करने के आदेश देते हुए एक अधिवक्ता आयुक्त नियुक्त किया है, जो चेन्नई में सभी पक्षों और उनके वकीलों की सहमति से सुविधाजनक स्थान पर धोनी के सबूत दर्ज करेगा।

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धोनी ने यह केस दो बड़े मीडिया संस्थानों, एक मशहूर पत्रकार और रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी जी. संपत कुमार के खिलाफ दायर किया था, जिसमें उन्होंने 100 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है। आरोप है कि इन लोगों ने उनका नाम 2013 के आईपीएल सट्टेबाजी घोटाले में घसीटा था। अदालत ने अधिवक्ता आयुक्त की नियुक्ति इसलिए की, ताकि धोनी की व्यक्तिगत उपस्थिति से अदालत में अव्यवस्था न हो।

धोनी ने हलफनामा देकर बताया कि वे 20 अक्टूबर 2025 से 10 दिसंबर 2025 के बीच जिरह के लिए उपलब्ध रहेंगे और मुकदमे की प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेंगे। यह मामला 2014 से लंबित है, क्योंकि बीच में पक्षकारों ने कई तरह की याचिकाएं दायर की थीं। दिसंबर 2023 में मद्रास हाईकोर्ट की खंडपीठ ने रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी को आपराधिक अवमानना का दोषी ठहराते हुए 15 दिन की साधारण कैद की सजा सुनाई थी, जिस पर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी।

आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामला
2013 में हुए इस घोटाले में श्रीसंत, अजीत चंदीला और अंकित चव्हाण जैसे खिलाड़ी फंसे थे। चेन्नई सुपरकिंग्स के मालिक एन. श्रीनिवासन के दामाद और टीम प्रिंसिपल गुरुनाथ मयप्पन का नाम भी इसमें आया था। इस विवाद के बाद राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई सुपरकिंग्स को दो साल के लिए आईपीएल से निलंबित कर दिया गया था।

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