Indian Space Research Organisation ने Gaganyaan के पाराशूट-सिस्टम का सफल परीक्षण किया


दिल्ली : इसरो ने अपने मानव अंतरिक्षयात्रा मिशन गगनयान की तैयारी के अंतर्गत एक महत्वूपर्ण परीक्षण पूरा किया है। इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य था कि यदि मुख्य पाराशूटों में से एक समय पर नहीं खुलता है तो कैप्सूल की स्थिति स्थिर बनी रहे।

परीक्षण के दौरान एक आयरल 76 विमान ने लगभग 2.5 किलोमीटर की ऊँचाई से क्रू मॉड्यूल के बराबर भारयुक्त सिम्युलेटर छोड़ दिया गया था।
मुख्य पाराशूट प्रणाली में कुल दस पाराशूट शामिल हैं — दो एपीक्स कवर्स को हटाने वाले, दो ड्रोग पैराशूट, तीन पायलट पाराशूट और तीन मुख्य पाराशूट। इनको चरणबद्ध तरीके से खोलने के लिए पहला “रीफेड” अवस्था में खुलता है और फिर पूरी तरह खुलने के लिए “डिसरीफेड” होता है।
इस परीक्षण में विशेष रूप से एक असममित स्थिति (asymmetric dis-reefing) पैदा की गई थी जिसमें मुख्य दो पाराशूटों में से एक सामान्य समय पर खुलता है और दूसरे में थोड़ी देरी होती है। इस तरह की परिस्थिति वास्तविक मिशन में उत्पन्न हो सकती है।
परीक्षण परिणाम उत्साहवर्धक रहे — प्रणाली ने अपेक्षा के अनुरूप काम किया और मॉड्यूल ने सुरक्षित रूप से उतराई सुनिश्चित की गई। इस सफलता को गगनयान मिशन के लिए पैराशूट सिस्टम की पात्रता (qualification) की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
अगला चरण अब इसरो के लिए उन परीक्षणों को पूरा करना है जहाँ मानवीय मिशन को ध्यान में रखकर पूरी समेकित प्रणाली को व्यवहार में लाया जाएगा, और इसके बाद अनक्रूड फ्लाइट तथा फिर मानव मिशन की ओर बढ़ा जाएगा।



