तेलंगाना बस एक्सीडेंट मे, किसी ने तीन बेटियां तो किसी ने बेटा और पिता को खोया

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हैदराबाद: सोमवार की सुबह डंपर और बस के बीच हुई भीषण भिड़ंत में 20 लोगों की जान चली। इसमें कई परिवार बिखर गए, किसी ने अपनी बेटी खोई, किसी ने बेटा तो किसी ने पिता. चेवेल्ला के पास हुए भीषण सड़क हादसे में उनकी तीनों बेटियों की मौत हो गई. यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, एक पिता की दुनिया उजड़ने की कहानी है.इस हादसे में 19 लोगों की मौत हुई,जिनमें तनुषा, सैप्रिया और नंदिनी शामिल थीं. तीनों बहनें हैदराबाद में पढ़ाई कर रही थीं और एक शादी में शामिल होने तंदूर आई थीं. हादसे के बाद शव चेवेल्ला के सरकारी अस्पताल लाए गए, जहां मां अंबिका बेसुध पड़ी थीं.हादसे में जान गंवाने वाली तीनों बहन हैदराबाद में पढ़ाई कर रही थीं और एक शादी में शामिल होने के लिए तांडूर आई थीं. परिवार ने हाल ही में बड़ी बेटी अनुषा की शादी का जश्न मनाया था, और अब एक और शादी के लिए बेटियां घर आई थीं. दुखी पिता ने बताया, “मैंने उन्हें आने के लिए मना भी किया था लेकिन उनकी मां ने उन्हें यहां पर बुला लिया. इसके बाद वो रात में वापस लौटना चाहती थीं, हमने कहा सोमवार सुबह निकलो. जब उन्हें बस स्टॉप छोड़ा, किसी ने कहा बस ठीक नहीं है, फिर भी भेज दिया. अब पूछता हूं कि तीन बेटियां चली गईं, मैं क्या करूंगा?”सैप्रिया बीएससी तृतीय वर्ष की छात्रा थी, नंदिनी बीकॉम प्रथम वर्ष में थी और तनुषा स्नातक पूरी कर नौकरी कर रही थी. तीनों बहनें पढ़ाई में होशियार थीं और परिवार का गर्व थीं. प्रधानाचार्य लोका पावनी ने बताया कि हादसे में संस्थान की तीन छात्राओं की मौत से हम सब दुखी हैं.

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हादसे में 33 साल की सलीहा बेगम भी अपने तीन महीने के बेटे के साथ मारी गईं. वो हैदराबाद अपने दादा-दादी से मिलने जा रही थीं. सफर छोटा था, पर मंजिल तक पहुंचने से पहले ही जिंदगी खत्म हो गई.जब राहत-बचाव टीम ने मलबा हटाया, तो सलीहा अपने बच्चे को सीने से लगाए मिलीं. ऐसा लग रहा था जैसे आखिरी वक्त में भी वो अपने बच्चे को बचाने की कोशिश कर रही थीं. ये तस्वीर हर किसी की आंखें नम कर गई.

वहीं एन हनुमंथु की जिंदगी उनके काम और परिवार के इर्द-गिर्द घूमती थी। उनको हैदराबाद जाना था और उनकी ट्रेन छूट गई, जिसके बाद उन्होंने बस से जाने का फैसला किया। वह अपने पीछे एक 10 साल का बेटा छोड़कर गए, जो दुर्घटना वाली जगह पर फूट-फूटकर रो रहा था।सड़क हादसा इस बात की याद दिलाता है कि रोड एक्सीडेंट में होने वाली मौतें कोई आंकड़े नहीं बल्कि ये माता-पिता, बच्चे या परिवार के वह लोग हैं जो अचानक ही ऐसा खालीपन छोड़कर चले जाते हैं जिसे कभी भी भरा नहीं जा सकता।

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