राष्ट्रपति ने संसद अभिभाषण में आपातकाल को संविधान पर सबसे बड़ा हमला बताया…

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लोक आलोक न्यूज सेंट्रल डेस्क:राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को संसद की संयुक्त बैठक में अपने संबोधन के दौरान तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 1975 में लगाए गए आपातकाल को संविधान पर “सबसे बड़ा हमला” कहा और इसे देश के इतिहास का “सबसे काला अध्याय” कहा।आम चुनावों के बाद 18वीं लोकसभा के गठन के बाद संसद में अपने पहले संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि आपातकाल के दौरान देश अराजकता में डूब गया था और कहा कि लोकतंत्र को “कलंकित” करने के प्रयासों की सभी को निंदा करनी चाहिए।

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सत्तारूढ़ भाजपा सदस्यों की जय-जयकार और विपक्ष के विरोध के बीच उन्होंने कहा, “आपातकाल संविधान पर सीधे हमले का सबसे बड़ा और काला अध्याय था। आपातकाल के दौरान पूरा देश अराजकता में डूब गया, लेकिन देश ऐसी असंवैधानिक शक्तियों के खिलाफ विजयी रहा।”

राष्ट्रपति ने कहा, “हमारे लोकतंत्र को कलंकित करने के हर प्रयास की सभी को निंदा करनी चाहिए। विभाजनकारी ताकतें लोकतंत्र को कमजोर करने, देश के भीतर और बाहर समाज में खाई पैदा करने की साजिश कर रही हैं।”

जून 1975 से मार्च 1977 तक लगभग दो वर्षों तक चलने वाला आपातकाल इंदिरा गांधी द्वारा लगाया गया था और संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद द्वारा सहमति व्यक्त की गई थी। आपातकाल की स्थिति इस तर्क पर घोषित की गई थी कि देश के लिए आसन्न आंतरिक और बाहरी खतरे थे।

आपातकाल पर राष्ट्रपति मुर्मू की टिप्पणी इस मुद्दे पर भाजपा और विपक्ष के बीच वाकयुद्ध की पृष्ठभूमि में आई है। जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रियों ने आपातकाल की भयावहता को याद किया, वहीं कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने हमले का जवाब देते हुए कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए शासन के पिछले 10 वर्षों से “अघोषित आपातकाल” लागू है।

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बुधवार को, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, जो लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए इस पद के लिए चुने गए, ने आपातकाल लागू किया और कहा कि भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचल दिया गया और “अंधेरे काल” के दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंट दिया गया।

उन्होंने इस दौरान अपनी जान गंवाने वाले नागरिकों की याद में दो मिनट का मौन भी रखा, जिसके बाद विपक्ष ने जोरदार विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू कर दी।

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