IDBI बैंक के निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों का प्रदर्शन, 60.72% हिस्सेदारी बेचने की योजना का विरोध

जमशेदपुर : IDBI बैंक के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को बिष्टुपुर स्थित IDBI बैंक में महिला और पुरुष कर्मचारियों ने दो दिवसीय धरना-प्रदर्शन कर केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की हिस्सेदारी बेचने की योजना का विरोध किया। कर्मचारियों ने कहा कि बैंक को घाटे और बढ़ते NPA से उबारकर रिकॉर्ड मुनाफे तक पहुंचाने में बैंककर्मियों की अहम भूमिका रही है। ऐसे में बेहतर वित्तीय प्रदर्शन के बाद बैंक का प्रबंधन नियंत्रण निजी निवेशक को सौंपने का फैसला उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से विनिवेश की प्रस्तावित प्रक्रिया वापस लेने की मांग की।

केंद्र सरकार और LIC की बैंक में कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना है। इसमें सरकार की 30.48 प्रतिशत और LIC की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है। प्रस्तावित सौदे का अनुमानित मूल्य करीब 52,878 करोड़ रुपये बताया गया है। सौदे के बाद सरकार की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत और LIC की हिस्सेदारी 19 प्रतिशत रह जाएगी। कर्मचारियों ने कनाडा की Fairfax Financial Holdings से जुड़ी कंपनी को हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि निजीकरण से रोजगार, वेतन, पदोन्नति, पेंशन, ग्रेच्युटी, आरक्षण और सामाजिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। उन्होंने आम ग्राहकों, किसानों, छोटे व्यापारियों और MSME उद्यमियों को मिलने वाली बैंकिंग सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका जताई।
कर्मचारियों के अनुसार, IDBI बैंक का सकल NPA सितंबर 2018 में लगभग 31.78 प्रतिशत तक पहुंच गया था। 5 मई 2017 को RBI ने बैंक को प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (PCA) के तहत रखा था। जनवरी 2019 में LIC ने बैंक में 51 प्रतिशत नियंत्रक हिस्सेदारी हासिल की और मार्च 2021 में RBI ने बैंक को PCA प्रतिबंधों से बाहर कर दिया। बैंक के वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में 9,513 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया गया। मार्च 2026 तक सकल NPA घटकर 2.32 प्रतिशत और शुद्ध NPA 0.15 प्रतिशत रह गया। बैंक का पूंजी पर्याप्तता अनुपात 26.65 प्रतिशत और कुल कारोबार छह लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। इसी बीच यूनाइटेड फोरम ऑफ IDBI ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज ने 2 और 3 नवंबर को देशव्यापी भूख हड़ताल का आह्वान किया है। संगठन सरकार और LIC की संयुक्त हिस्सेदारी कम से कम 51 प्रतिशत बनाए रखने तथा कर्मचारियों की सेवा शर्तों को कानूनी संरक्षण देने की मांग कर रहा है। धरना-प्रदर्शन में तपन मुर्मू, राकेश मल्होत्रा, अमित कुमार, प्रभात कंसवार और प्रभात कुमार समेत बैंक अधिकारी शामिल हुए।


